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मनुष्य भव में करें क्रोधाग्नि, कामाग्नि और जठराग्नि से मुक्त होने का प्रयास : श्रमण निरंतर अपनी साधना, त्याग और तपस्या से बुझाते हैं इन अग्नियों को

संसार में फंसा मनुष्य क्रोधाग्नि, जठराग्नि के वशीभूत होकर भवभ्रमण करता है और अति संक्लेशों से मरकर नरकादि में गिर जाता है। यह मनुष्य भव और जिनधर्म असीम...

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