Tag - Digambar Jain Adinath Jinalaya

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सभी प्राणियों के प्रति सत्वेषु मैत्री का भाव रखें: आर्यिका यशस्विनी माताजी के आशीर्वचनों को सुनने के लिए भक्तों की रहती है भीड़ 

आजकल प्रत्येक क्षेत्र में सत्वेषु मैत्री का अभाव दिखाई दे रहा है। परिणाम स्वरूप घर परिवार टूट रहे हैं। परिवार के सदस्यों में परस्पर में करुणा एवं वात्सल्य का...

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जीवन और व्यवहार में विनम्रता का भाव होना ही मार्दव धर्म है: दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में पर्यूषण पर्व पर हुए प्रवचन 

अभिमान अहंकार व्यक्तित्व के विकास में बाधक है। महान वही बनता है जो विनम्र होकर मार्दव धर्म का पालन करता है। यह उद्गार दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में...

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पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी का विहार होगा : मंगलवार को सुमतिधाम से छत्रपति नगर में मंगल प्रवेश

पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ मंगलवार को शाम 4 बजे सुमतिधाम गांधी नगर से विहार करेंगे। आचार्य श्री वहां से दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर...

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पंचम काल में जन्म लेने वाले अच्छे नहीं माने जाते-उपाध्याय विश्रुत सागर जी : समाजजनों ने छत्रपति नगर में धर्मसभा का लाभ लिया

दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने प्रवचन में समता, संयम और धर्म के बारे में...

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भगवान श्री आदिनाथ के जन्म कल्याणक पर रजत पालकी यात्रा: महामस्तकाभिषेक एवं शांतिधारा कर की आराधना

आदिनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव छत्रपति नगर के दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय में मनाया गया। तीर्थंकर आदिनाथ की प्रतिमा को रजत पालकी में विराजमान कर...

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घर-परिवार समाज में सभी के साथ प्रेम, प्रीति और विनय का भाव रखें-श्री आदित्य सागरजीः निंदा नहीं, गुणों की प्रशंसा करें

व्यक्ति का व्यवहार ही उसकी पूंजी है। उसके व्यवहार से ही वह पहचाना जाता है। विनम्रता व्यवहार में दिखना भी चाहिए तभी किसी व्यक्ति से उसका जुड़ाव होगा। प्रीति नहीं...

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