Tag - Big Jain Temple

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स्व विवेक से किया कार्य ही सार्थक परिणाम देता है : मुनिश्री विहसंत सागर ने स्वविवेक के प्रयोग का बहुमूल्य अर्थ बताया 

विवेकपूर्ण व्यक्ति संसार में यश प्राप्त करते हैं और अविवेकी व्यक्ति उपहास के पात्र बनते हैं। किसी भी कार्य को करने से पूर्व व्यक्ति को अपने विवेक का इस्तेमाल...

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धर्म बुढ़ापे में नहीं यौवनावस्था में अपनाएं : मुनिश्री विहसंत सागर जी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में दिया दिव्य प्रबोधन 

आचार्यों ने कहा है कि धर्म तो प्रारंभ से ही करना चाहिए। बुढ़ापे में जब आपके अंग शिथिल हो जाएंगे तो धर्म की उपासना कैसे होगी। यह उद्गार आचार्यश्री विराग सागरजी...

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प्रभु आराधना निःस्वार्थ भाव से ही करें: मुनिश्री विहसंत सागर का मुरैना नगर में हुआ भव्य आगमन

हमें जीवन में यदि सकारात्मक परिर्वतन चाहिए तो भगवान महावीर, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, श्रीकृष्ण एवं अन्य महापुरुषों के आदर्शों पर चलना होगा। जब हममें...

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छोटे-छोटे नियम पालने से आत्मबल बढ़ता है: मुनिश्री विलोकसागर ने साधना और संयम को श्रेष्ठ बताया 

बड़े जैन मंदिर में पांच माह तक धर्म प्रभावना करने के बाद रविवार को अंतिम दिन मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक प्राणी...

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हम ऐसे कर्म करें जिससे मनुष्य जन्म लेना सार्थक हो : सिद्ध परमेष्ठियों की भक्ति मय पूजन के साथ समर्पित होंगे 256 अर्घ्य 

सिद्धों की आराधना पूजा भक्ति उपासना के अनुष्ठान के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि पुण्योदय से ही हम सभी को मनुष्य...

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आदर्शाे सिद्धांतों का दृढ़ता से पालन करें: मुनिश्री विलोकसागरजी ने करेंगे सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ 

आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के शुभारंभ से पूर्व बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में कैसी भी...

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विषम परिस्थितियों में समता भाव रखना भी बड़ी तपस्या: मुनिश्री विलोकसागर जी ने ‘समयसार’ ग्रंथ की वाचना कर बताए जीवन के रहस्य 

मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में सिद्धांत ग्रंथ ‘समयसार’ की व्याख्या करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में मन की स्थिति को अनुकूल रखना भी एक...

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मुनिश्री विलोकसागर जी ने कहा ईश्वर न किसी को सुख देते हैं, न दुख देते हैं: 7 अक्टूबर को पाठशाला के बच्चे होंगे सम्मानित

भगवान न किसी का अच्छा करते हैं, न किसी का बुरा करते हैं। भगवान न किसी को सुख देते हैं, न किसी को दुख देते हैं। यह सब तो प्राणी मात्र के कर्मों पर निर्भर करता...

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अपने-अपने कर्मों का फल सबको मिलता है कुछ इस भव में तो कुछ परभव में: मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने कर्म गति की महत्ता पर दिया जोर

मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक प्राणी को अपने कर्मों के परिणामों से डरना चाहिए। भले ही वह ईश्वर...

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पुण्य और पाप से ही संसार में होती है सुख दुख की प्राप्ति : मुनिश्री विलोकसागर जी के प्रवचनों में सुख दुःख पर चर्चा 

बड़े जैन मंदिर में धर्म सभा के दौरान मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने कहा कि सांसारिक जीवन में सुख और दुख का चक्र घूमता रहता है। जब हमारे अच्छे कर्म उदय में आते...

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