Tag - Aryika Vibhashree Mataji

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जिनसहस्रनाम के मंत्रों से शांतिधारा और सिद्धों की आराधना : हमेशा अपने पुण्य की लकीर को बड़ा करो – आर्यिका विभाश्री

गणिनी आर्यिका विभा श्री माता जी के सानिध्य में प्रातः काल जिनसहस्रनाम के मंत्रों से शांतिधारा और सिद्धों की आराधना की गई। इस अवसर पर मंत्रोच्चार द्वारा सातवें...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : किसी के उपकार को मानना हमारे बड़प्पन का द्योतक है – आर्यिका विभाश्री 

 आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि जब कोई किसी के उपकार को मानता है तो वो जीवन में बहुत ऊचाइयों को प्राप्त कर लेता है, चाहे वह गुरुओं का उपकार...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : कर्तव्यों का सम्यक निवर्हन ही सच्चा धर्म है- आर्यिका विभाश्री

श्री दिगम्बर जैन वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में जैन संत गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि कर्तव्यों का पालन करने से धर्म का निर्वाह...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : अहंकार और आलस्य पतन का भाव उत्पन्न करते है – आर्यिका विभाश्री

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि आत्मा के शांत समुंद्र में जो राग-द्वेष रूपी लहरें उठती हैं, यही हमारे...

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चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन हो रही है धर्मसभा : आत्मा बीज रूप है जो स्वयं ही पुरुषार्थ करके परमात्मा बन जाती है – आर्यिका विभाश्री माताजी

गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ससंघ ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान बीते 6 जुलाई को शिक्षण शिविर में अपनी वाणी से सभी...

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