‘जीवन है पानी की बूंदे’ महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी ससंघ 35 पिच्छी के सानिध्य में नगर के नई मंडी क्षेत्र में श्री कल्पतीर्थ मंडपम में...
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33 पिच्छीधारी दिगंबर साधु-साध्वी के साथ पधारे आचार्यश्री विमर्श सागर जी के आगमन से खतौली धर्मनगरी की धरा पावन हुई। यहां का कण-कण गुरु भक्ति में सराबोर हुआ।...








