Tag - Acharyashree Vimarsh Sagar Ji

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कषायों को रोककर आत्म स्वभाव में रमना ही धर्म : आचार्यश्री विमर्श सागर जी के सान्निध्य में मुजफ्फरनगर में पहली बार 24 समवशरणों की आराधना 

‘जीवन है पानी की बूंदे’ महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी ससंघ 35 पिच्छी के सानिध्य में नगर के नई मंडी क्षेत्र में श्री कल्पतीर्थ मंडपम में...

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सदैव याद रखें मुझे भगवान की खोज करना है: आचार्य श्री विमर्श सागर जी ने दी देशना

33 पिच्छीधारी दिगंबर साधु-साध्वी के साथ पधारे आचार्यश्री विमर्श सागर जी के आगमन से खतौली धर्मनगरी की धरा पावन हुई। यहां का कण-कण गुरु भक्ति में सराबोर हुआ।...

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