संसारी जीवों के पास दो प्रकार का वैभव पाया जाता है। पहला बाहरी धन-वैभव और दूसरा आत्मा का अंतरंग गुण धन। बाहरी धन वैभव पुष्य कर्म के अधीन है जो सदैव घटता-बढ़ता...
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नगर में 24 समवशरणों की अनुपम रचना की गई है। कल्पतीर्थ मण्डपम् में श्री 1008 कल्पद्रुम महामण्डल विधान की आराधना चल रही है।आचार्य श्री विमर्श सागर जी के विशाल...
24 घंटे में एक कार्य स्वार्थ रहित होकर अवश्य करें : आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा-जीवन संवर जाएगा
जीवन है पानी की बूंद महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी अपने विशाल चतुर्विध संघ (30 पिच्छी) के साथ प्रथम बार प्राचीन धर्मनगरी रामपुर मनिहारान...
सहारनपुर के जैनबाग प्रांगण में देखने को मिला एक अनूठा दृश्य। राजधानी दिल्ली से पधारे जिनागम पंथी श्रावक संघ के बाल-युवा साथी जब एक जैसे लाल रंग के परिधान में...
आचार्य श्री विमर्शसागर जी का चातुर्मास सहारनपुर उप्र में चल रहा है। यहां पर नित भक्ति के साथ पूजन-अर्चन और धर्म आराधना का दौर जारी है। नित प्रवचन में...
जीवन में अच्छाइयां बड़ी कठनाई से प्राप्त होती है और बुराइयां मानव के जीवन में हरपल दरवाजा खटखटाती रहती है। बड़ी गजब की बात है कि मानव अपने जीवन में गुण चाहता है...
आचार्यश्री विमर्शसागर जी 10 जुलाई को संपूर्ण आचार्य संघ निर्जल उपवास के साथ वर्ष 2025 के चातुर्मास के लिए मंगल कलश स्थापना करेंगे। सुबह 10 बजे से ही कार्यक्रम...
आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने देशभक्ति से ओतप्रोत देश और धर्म के लिए जिओ रचना लिखी, जिसे मध्यप्रदेश शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। आचार्य श्री...








