मैं जब अपने से बड़ों से मिलता हूं तो क्षीर में नीर की तरह मिलने का प्रयास करता हूं और अपने से छोटों से मिलता हूं तो उन्हें अपने में मिलाने का प्रयास करता हूं...
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हम नित नए निर्माण तो करते जा रहे है, पर प्राचीन पूरा वैभव की ओर किसी का ध्यान नहीं है। प्राचीन तीर्थ क्षेत्रों की प्राचीनता पावनता, भव्यता, पुरातत्वता ज्यों की...
जैन धर्म दर्शन, साहित्य, शिक्षा आदि अनेक विषयों के प्रकांड विद्वान सरलता एवं सादगी के प्रतीक, संपादक अनेक लेख एवं शोध आलेख के लेखक, संस्कृत, प्राकृत, अंग्रेजी...
आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज और आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर जी महाराज का मंगल मिलन हुआ। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट… जबलपुर। शुक्रवार को परम...








