Tag - संयम धर्म

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सनावद में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई अनंत चतुर्दशी : उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर मुनि श्री साध्य सागर और मुनि श्री विश्वसूर्य सागर के प्रवचन

सनावद में पर्युषण पर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी बड़े भक्तिभाव के साथ मनाई गई। मुनि श्री साध्य सागर जी और मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी ने उत्तम ब्रह्मचर्य...

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सहारनपुर में दशलक्षण पर्व पर आचार्य श्री ने बताया त्याग का महत्व : संग्रहवृति दुःख का कारण है, “उत्तम त्याग धर्म” सुख का मार्ग – आचार्य विमर्शसागर

सहारनपुर में दशलक्षण पर्व के अंतर्गत आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा कि संग्रहवृति दुःख का कारण है और त्याग धर्म ही जीवन को सुखी बनाता है। निस्वार्थ दान और...

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तीर्थंकर पद भी संयम धारण किए बिना संभव नहीं, मंगल देशना : आत्मा की उन्नति के लिए संयम रूपी ऊर्जा शक्ति जरूरी – आचार्य वर्धमान सागर

दसलक्षण पर्व के छठे दिन आचार्य वर्धमान सागर जी ने कहा कि आत्मा की उन्नति और तीर्थंकर पद की प्राप्ति के लिए संयम रूपी ऊर्जा शक्ति अत्यंत आवश्यक है। संयम जीवन का...

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संयम बंधन नहीं, अभिनंदन का दिन है : संयम के बिना जीवन गाड़ी बिना ब्रेक की तरह – क्षुल्लक जी का संदेश

धरियावद में पर्यूषण पर्व के छठे दिन क्षुल्लक महोदय सागर जी महाराज ने कहा कि संयम बंधन नहीं, बल्कि अभिनंदन का दिन है। संयम जीवन का ब्रेक है, जिसके बिना मनुष्य...

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अंबाह में सुगंध दशमी पर्व पर धूप अर्पित, महिलाओं ने रखा उपवास : सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रवचनों से गूंजा समाज, श्रद्धालुओं ने लिया धर्म लाभ

अंबाह में सुगंध दशमी पर्व पर भक्तों ने मंदिरों में धूप अर्पित की और महिलाओं ने उपवास रख संयम साधना की। पंडित आयुष शास्त्री ने प्रवचन देकर संयम धर्म का महत्व...

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अभिमान त्यागने से ही मिलता है आत्मिक सुख और शांति : अहंकार विष के समान, मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है – पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी

पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि अहंकार विष के समान है, जो आत्मा को भीतर से खोखला कर देता है, जबकि मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है...

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क्षमा धर्म से शत्रु भी बन जाते हैं मित्र – चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा : पर्यूषण पर्व आत्म क्रांति का पर्व है, विश्व बंधुत्व की भावना को करता है प्रबल – क्षुल्लक महोदय सागर जी

धरियावद में श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में क्षुल्लक महोदय सागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यूषण पर्व आत्म क्रांति का पर्व है, जो मानव...

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इंद्रध्वज महामंडल विधान का शुभारंभ, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में समझाया क्षमा और दश धर्म का महत्व : दशलक्षण महापर्व की शुरुआत, आचार्य श्री ने कहा – क्षमा आत्मा का स्वभाव है, पर्व देता है आत्मिक दीपावली का संदेश

  दशलक्षण महापर्व के प्रथम दिन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सानिध्य में इंद्रध्वज महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। विधानाचार्य पंडित कीर्तीय पारसोला...

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पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक आचार्य वर्धमान सागर जी के सानिध्य में श्रद्धा और भक्ति से मनाया : जिन पूजन करने वाला एक दिन पूज्यता को प्राप्त होता है 

टोंक में आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। धर्मसभा में महिलाओं को...

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