आचार्य वर्धमान सागर जी जैन समाज के निवेदन पर शीतकालीन प्रवास 32 साधुओं के साथ पार्श्वनाथ नसिया जी संत भवन में कर रहे हैं। जबसे आचार्य श्री पधारे है, प्रति...
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24 घंटे में एक कार्य स्वार्थ रहित होकर अवश्य करें : आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा-जीवन संवर जाएगा
जीवन है पानी की बूंद महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी अपने विशाल चतुर्विध संघ (30 पिच्छी) के साथ प्रथम बार प्राचीन धर्मनगरी रामपुर मनिहारान...








