जब तक श्रावक हैं, तभी तक श्रमण परंपरा कायम हैं। जब श्रावक ही नहीं होगें, तो श्रमण परंपरा स्वतः समाप्त हो जाएगी। दिगंबर साधुओं की परंपरा को जारी रखने में...
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जीवन में गुरु के महत्व और आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता । आध्यात्मिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एक सच्चे गुरु का होना अति आवश्यक है। गुरु ही हमें अच्छे बुरे...
मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक प्राणी को अपने कर्मों के परिणामों से डरना चाहिए। भले ही वह ईश्वर...
पर्यूषण पर्व में उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्ज़व धर्म के बाद चौथे दिन बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज ने...
जैनाचार्यश्री आर्जवसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के आध्यात्मिक वर्षायोग में प्रतिदिन प्रवचनों के माध्यम से...
जैन संतों साध्वियों की चर्या बहुत ही कठिन और कष्ट साध्य है। यहां तक कि वे अपने सिर, दाढ़ी, मूंछों के वालों को भी हाथ से उखाड़कर फैंकते हैं। नगर में चातुर्मासरत...
जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव 31 जुलाई को विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पूर्ण श्रद्धा और...
हरियाली तीज पर बड़े जैन मंदिर में उत्सव जैसा माहौल था। जैन मिलन बालिका मंडल की 50 से अधिक बालिकाएं युगल मुनिराजों को आहार दान देने के लिए दृढ़ संकल्प और नवधा...








