भारतीय संस्कृति को विश्व की सबसे प्राचीन और अनादि परंपरा के रूप में स्थापित करना है तो हमें जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ और उनके ज्येष्ठ पुत्र भरत...
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श्री शांतिनाथ जिनालय, स्टेशन जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में मुनि श्री संभवसागर महाराज ने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि मनुष्य की वास्तविक महानता बाहरी...
गणाचार्य भगवन विरागसागर जी ने अपने संयमकाल में अनेकों सिद्धांत ग्रंथों का लेखन करके अचेतन कृतियों का सृजन किया। महाश्रमण विशुद्धसागर जी को गणाचार्य भगवन ने...
अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन आदिनाथ पुराण का वाचन हो रहा है। आदिनाथ पुराण का वर्णन करते हुवे बताया कि मरु देवी के पुत्र का...
अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन आदिनाथ पुराण का वाचन हो रहा है। आदिनाथ पुराण का वर्णन करते हुवे बताया कि हमारा सबसे आवश्यक...








