Tag - दसलक्षण धर्म

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त्याग धर्म में राजा श्रेयांस ने सबसे पहले दानतीर्थ का प्रवर्तन किया : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने त्याग और दान को श्रेष्ठतम निरुपित किया 

दसलक्षण धर्म में पहले दिन से चार कषायों का त्याग करने की शिक्षाऔर उपदेश दिए गए। शास्त्रों और पूजन में उल्लेख है कि दान चार प्रकार का है और चार संघ को दीजिए। यह...

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सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में पर्वराज पर्युषण पर भक्ति भाव से हुए धार्मिक अनुष्ठान : आर्यिका आगममति जी का मिल रहा सानिध्य  

जैन धर्म के पर्वराज दसलक्षण के दूसरे दिवस उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाते हैं। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र ,गुजरात से...

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क्षमा धर्म से शत्रु भी बन जाते हैं मित्र – चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा : पर्यूषण पर्व आत्म क्रांति का पर्व है, विश्व बंधुत्व की भावना को करता है प्रबल – क्षुल्लक महोदय सागर जी

धरियावद में श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में क्षुल्लक महोदय सागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यूषण पर्व आत्म क्रांति का पर्व है, जो मानव...

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श्रावकों को संयम का मार्ग दिखाता है पर्यूषण पर्व : संयम की साधना में पंचेंद्रियों पर अंकुश आवश्यक -मुनिश्री विलोकसागर’

जैन दर्शन में प्राणी मात्र के कल्याण पर जोर दिया गया है। संसार के प्रत्येक प्राणी के अंदर अपार क्षमता है लेकिन, कषायों के वशीभूत होकर वह सब कुछ भूल चुका है।...

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