Tag - जैन मुनि प्रवचन

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संयमित जीवन और धैर्य पर जैन संत का प्रेरक संदेश : जीवन का अधिकांश हिस्सा बुद्धि से जीते हैं, विवेक से नहीं – आचार्य प्रसन्न सागर जी

कोडरमा तरुणधाम तीर्थ पर विराजमान आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि जीवन में अनेक बार इंतजार करना पड़ता है, लेकिन गाड़ी ओवरटेक करते समय...

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दशलक्षण पर्व के सप्तम दिन उत्तम तप धर्म की महिमा पर प्रवचन : इच्छाओं को रोकना ही सच्चा तप है – आचार्य विनिश्चय सागर जी महाराज

रामगंजमंडी में दशलक्षण पर्व के सप्तम दिन परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी महाराज ने उत्तम तप धर्म की महिमा पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि इच्छाओं को...

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प्रतिक्रमण से पापों का क्षय होता है, आत्मा आध्यात्मिक मार्ग पर बनी रहती है : प्रत्येक श्रावक को प्रतिदिन प्रतिक्रमण करना चाहिए – अनूप भंडारी

मुरैना में पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के परम भक्त श्रावक श्रेष्ठी अनूप भंडारी ने प्रतिक्रमण के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रतिक्रमण कर्मों के...

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दशलक्षण महापर्व का सातवाँ दिन – उत्तम तप का संदेश : आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज का प्रवचन

तरुणसागरम तीर्थ, कोडरमा में दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महामुनिराज ने उपस्थित गुरु-भक्तों को उत्तम तप धर्म का संदेश...

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शौच धर्म पर पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी का प्रेरक प्रवचन: लोभ त्याग ही सच्चा शौच धर्म है 

विरागोदय तीर्थ पथरिया में पट्टाचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का मंगल चातुर्मास जारी है। धर्मसभा में उन्होंने कहा कि शौच धर्म का अर्थ केवल बाहरी...

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क्षमा धर्म से शत्रु भी बन जाते हैं मित्र – चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा : पर्यूषण पर्व आत्म क्रांति का पर्व है, विश्व बंधुत्व की भावना को करता है प्रबल – क्षुल्लक महोदय सागर जी

धरियावद में श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में क्षुल्लक महोदय सागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यूषण पर्व आत्म क्रांति का पर्व है, जो मानव...

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धरियावद में निर्वाण कल्याणक एवं रक्षाबंधन पर्व हर्षोल्लास से मनाया : 700 मुनिराजों पर विष्णु कुमार मुनिराज द्वारा उपसर्ग निवारण की कथा प्रस्तुत

धरियावद स्थित श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में क्षुल्लक 105 श्री महोदय सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक 105 श्री पुण्योदय सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में श्री...

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धर्म और आत्मा का असली स्पर्श तब होता है, जब मनुष्य भीतर से बदलने को तैयार होता है : चोर चोरी से जाए, पर हेराफेरी से न जाए – आचार्य विनिश्चयसागर

रामगंजमंडी में आयोजित जैन धर्मसभा में आचार्य श्री विनिश्चयसागर जी ने मनुष्य के आचरण और मूल्यों को केंद्र में रखकर संयम और सच्चाई की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने...

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