Tag - आर के पुरम

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मित्रता में समता भाव आता हैः चिंतामणि रत्न समान मानव पर्याय का प्रतिक्षण अनमोल है-मुनि संयत सागरजी 

मानव जीवन दुर्लभ चिंता मणि रत्न के समान है। बड़े भाग्य से नर तन पाया मनुष्य कुल पर्याय मिली। श्री जिनवर के दर्शन करने जिनवाणी की राह मिली। मानव जीवन का प्रत्येक...

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आर के पुरम जैन समाज का साहसिक निर्णय : सप्त व्यसनी व्यक्ति कमेटी का सदस्य नहीं बन सकता

नई दिल्ली के आर के पुरम सेक्टर 4 की जैन समाज ने एक साहसिक निर्णय लिया है कि सप्त व्यसनी व्यक्ति को मंदिर कमेटी की प्रबंधकारिणी में कोई स्थान नहीं दिया जाएगा।...

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