Tag - आर्यिका विभाश्री

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ईर्ष्या मनुष्य के चरित्र में लाभ की जगह हानि का बीज बोती है : आर्यिका विभाश्री ने ईर्ष्या भाव के बारे में बताया 

व्यक्ति को जीवन में कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। ईर्ष्यालु व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता, वह कभी भी गुणों को ग्रहण नहीं करता। दूसरों का सुख वह देख नहीं सकता है...

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भगवान की भक्ति, आराधना एवं विशुद्ध आचरण से दुर्लभ से दुर्लभ वस्तु भी सुलभता से प्राप्त हो जाती है : आर्यिका विभाश्री ने प्रभु की भक्ति की महिमा का किया बखान 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन के माध्यम से प्रभु की भक्ति की महिमा का व्याख्यान किया | जब मेरा मन और तन पवित्र...

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कर्तव्यों का सम्यक निवर्हन ही सच्चा धर्म है : आर्यिका विभाश्री ने दिया कर्तव्य और निष्ठा के बारे में बताया 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि कर्तव्यों का पालन करने से धर्म का निर्वाह स्वयं हो जायेगा, क्योंकि...

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