Tag - आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज

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तीर्थंकर बालक जन्म से मति, श्रुत और अवधि ज्ञान के धारी होते हैं : भगवान का जन्म कल्याणक श्रद्धा, भक्ति उत्साह से मनाया गया

संसार समुद्र में दुःख से डूबे हैं, संसार में सुख नहीं है, सुख शाश्वत होना चाहिए और शाश्वत सुख धर्म से मिलता है और धर्म से पुण्य कमाया जाता है और पुण्य से ही...

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आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ससंघ का मंगल प्रवेश को लेकर उत्साह: पीपल्दा गांव में श्रीमज्जिनेंद्र जिन बिंब पंच कल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की चल रही तैयारी 

सवाई माधोपुर जिले के मित्रपुरा तहसील स्थित पीपल्दा गांव में श्रीमज्जिनेंद्र जिन बिंब पंच कल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ...

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धर्म रूपी विश्व विद्यालय से ज्ञान मिलता है : आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ भगवान और आचार्य श्री शांति सागर जी का संयोग बताया 

राग और द्वेष से कर्म बंध होते हैं। इससे सुख का नाश होता है। संसार में जन्म मरण का परिभ्रमण होता रहता है। हमें जो भौतिक पदार्थ पुरुषार्थ से मिले हैं। वह वास्तव...

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आचार्यश्री के वचन-साधु समाधि साधना से मरण को सुमरण बनाते हैं: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने भक्ति और साधना का महात्म्य बताया 

वीतरागी, सर्वज्ञ और हितोपदेशी भगवान द्वारा प्रतिपादित जिन धर्म केवलज्ञान रूपी लक्ष्मीयुक्त है। जो धर्मधारण पालन करने से मिलती है। धर्म का संग्रह और धन के...

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टोंक में आचार्यश्री वर्धमानसागर जी का मंगल प्रवेश : नगर में आकर्षक सजावट के साथ उत्साह का माहौल 

आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें...

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आचार्यश्री वर्धमानसागर जी के चातुर्मास की घोषणा 27 को: आचार्य पदारोहण जहाजपुर में मनेगा

आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण...

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आचार्यश्री वर्धमानसागर जी के चातुर्मास की घोषणा 27 को: आचार्य पदारोहण जहाजपुर में मनेगा 

आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण...

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मुनि श्री प्रशम सागर जी का चारों प्रकार के आहार का त्याग: संयम साधना करते हुए यम संल्लेखना धारण की

88 वर्षीय मुनि श्री प्रशमसागर जी महाराज ने शरीर संयम साधना में बाधक होने के कारण चारों आहार का त्याग किया। आचार्यश्री वर्धमानसागर जी सहित विराजित संघ से...

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आचार्य साधु परमेष्ठी चलते-फिरते तीर्थ : 22 वर्षों के बाद पदार्पण पर हुई धर्मसभा

आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज अपने 9 मुनिराजों, 22 आर्यिकाओं तथा 2 क्षुल्लकों कुल 34 साधुओं का 22 वर्षों के बाद धरियावाद प्रवेश हुआ। कर जिनवाणी भेंट की।...

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