हमारे मन में सहज ही यह भाव आ सकता हैं कि हमारे उठने-बैठने से शरीर पर या किसी को क्या फर्क पड़ सकता है। परंतु इसका हम गहराई से अध्ययन करें तो यह जानकर आश्चर्य...
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प्रयास करें कि जीवनचर्या प्रकृति के नियमों के अनुरूप चले। प्रकृति का सहज नियम है कि रात सोने के लिए, दिन जागने के लिए है। बच्चा हो युवा या बूढ़ा, सर्विसमेन, हो...
प्रतिस्पर्धा के इस युग में लौकिक या आध्यात्मिक कोई भी ऐसा मार्ग नहीं जहाँ आपसे असंतुष्ट लोगों का समूह न हो। आप उसकी चिंता न करते हुए आगे बढ़ने का संकल्प...
टालम-टोल करने का रवैया आपके लिए चिंता बनाये ही रखेगा। यदि आप किसी काम को नहीं करना चाहते हैं तो आप स्पष्ट रूप से विनम्रता से मना करने का साहस भी रखें। हमेशा...
मन-वचन-काय तीनों के प्रयास संयत हों। संयत प्रयास ही जीवन में संतुलन बनाते हैं। यही संतुलन आदमी को निश्चिंत बनाता है। निश्चिंत होना ही ध्यान है। ध्यान एकाग्रता...
बच्चों पर टी.वी. देखने से मानसिक कुप्रभाव सबसे ज्यादा और गहरे समय तक के लिए पड़ता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि टी.वी. देखने से बच्चों में पढ़ाई की रुचि कम हो...
दैनिक जीवन की सभी छोटी-बड़ी प्रवृत्ति सावधानीपूर्वक करें। ‘आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत‘ इस प्राचीन सूत्र के अनुसार ऐसा कोई भी आचरण न करें, जो दूसरों के...
मन-वचन-काय की प्रत्येक एक्टिविटी (क्रिया) में सावधानी हो। ऐसी सावधानी जिससे बाद में दण्ड न भुगतना पडे़, पछताना न पडे़। महावीर भगवान् ने इसके लिए एक शब्द दिया...
सूत्र वाक्य छोटे होते हैं लेकिन उनका निर्माण बडे़ अनुभवों के आधार पर होता है। महापुरुषों ने जो कुछ भी कहा, सूत्रात्मक ही कहा। सूत्र वाक्य ही सूक्तियां कहलाती...
सूत्र वाक्य छोटे होते हैं लेकिन उनका निर्माण बडे़ अनुभवों के आधार पर होता है। महापुरुषों ने जो कुछ भी कहा, सूत्रात्मक ही कहा। सूत्र वाक्य ही सूक्तियां कहलाती...








