शास्त्रों में कहा कि विपरीत वृत्ति वालों के प्रति मध्यस्थ भाव रखना चाहिए, माध्यस्थ भाव रखना हमारा धर्म या स्वभाव नहीं है, हमारी मजबूरी है क्योंकि सामने वाला...
Tag - मुनि श्री सुधासागर महाराज
भाग्योदय तीर्थ क्षेत्र में सोमवार शाम अचानक अफरातफरी का माहौल बन गया। लोग इधर से उधर भागने लगे, क्योंकि अस्पताल के मेडिकल में आग लग गई। देखते ही देखते 15 से 20...
सागर। जितना एक व्यक्ति अच्छा बनने का प्रयास कर रहा है, उतना वह अच्छा नहीं बन पा रहा है। जितनी ऊंचाई को छूने का प्रयत्न कर रहा है, उतना ऊंचा उठ नहीं पा रहा।...
जब जब हमें अच्छेपन की फीलिंग हो कि मुझे अब कोई दुख नहीं है, समझ लेना तुम्हारे बहुत जल्दी दुख आने वाला है। मेरा परिवार बहुत अच्छा है कोई परेशानी नहीं, बस सब...
धर्म समझाया नहीं जाता, समझा जाता है लेकिन संसार में व्यक्ति समझना नहीं चाहता, समझने की चेष्टा भी नहीं करना चाहता और समझाए कोई तो मानना नहीं चाहता। परिणाम...
धर्म वह नहीं है जो पर वस्तु को ग्रहण करने की बात करें, जब व्यक्ति के मन में एक अनुभूति जागती है कि मैं अपने आप में पूर्ण हूं जो हमारा है वही हमारा है। एक धर्म...
धर्मात्मा की पहचान है क्रिया, कुछ न कुछ करता हुआ पाया जाएगा। धर्म हमें सक्रिय करता है। 24 घण्टे में तुम कोई क्रिया करो, तुम्हारी हर प्रवृत्ति में धर्म की...
त्योहार धर्मात्मा बनाता है और पर्व धर्म बनाता है। कितने त्योहार होते हैं वह किसी न किसी धर्मात्मा से जुड़े होते हैं, व्यक्तिगत होते हैं। जब- जब धर्मात्मा किसी...
कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जो स्वयं के कल्याण के साथ-साथ जगत के कल्याण के लिए भी शगुन जाती है, कल्याण तो उपदान से होता है लेकिन निमित्त कभी कभी किसी कल्याण का...
व्यवहार सत्य स्वरूपी होता है और निश्चय उस शक्ति को बताता है, शक्ति में कभी आनंद नही है, शक्ति में एक अहंकार आता है। जब जब किसी को शक्ति का भान होता है, उसका...








