Tag - बड़े जैन मंदिर

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मुनिश्री विलोकसागर जी ने कहा ईश्वर न किसी को सुख देते हैं, न दुख देते हैं: 7 अक्टूबर को पाठशाला के बच्चे होंगे सम्मानित

भगवान न किसी का अच्छा करते हैं, न किसी का बुरा करते हैं। भगवान न किसी को सुख देते हैं, न किसी को दुख देते हैं। यह सब तो प्राणी मात्र के कर्मों पर निर्भर करता...

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अपने-अपने कर्मों का फल सबको मिलता है कुछ इस भव में तो कुछ परभव में: मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने कर्म गति की महत्ता पर दिया जोर

मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक प्राणी को अपने कर्मों के परिणामों से डरना चाहिए। भले ही वह ईश्वर...

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पुण्य और पाप से ही संसार में होती है सुख दुख की प्राप्ति : मुनिश्री विलोकसागर जी के प्रवचनों में सुख दुःख पर चर्चा 

बड़े जैन मंदिर में धर्म सभा के दौरान मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने कहा कि सांसारिक जीवन में सुख और दुख का चक्र घूमता रहता है। जब हमारे अच्छे कर्म उदय में आते...

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अंतरंग के भावों के अनुरूप ही कर्मफल की होती है प्राप्ति: मुनिश्री विलोकसागर जी के सानिध्य में प्रतियोगियों का बहुमान

यदि हमारे हृदय में करुणा का भाव नहीं हैं तो आपकी पूजा भक्ति कभी भी सफल नहीं हो सकती। यह उद्गार नगर में चातुर्मासरत जैन संत मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े...

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उत्तम आकिंचन्य धर्म की गहन व्याख्या का मिला पुण्य लाभ: सखी नाटक के मंचन और प्रश्नमंच के माध्यम से हुआ युवा और बच्चों का जुड़ाव 

पर्यूषण महापर्व के अंतर्गत शुक्रवार को बड़े जैन मंदिर में सांगानेर से पधारे पंडित सौरभ शास्त्री ने उत्तम आकिंचन्य धर्म की गहन व्याख्या की। इस दौरान नगर पालिका...

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मुक्ति तभी संभव जब अंतरंग के विकार हों नष्ट :  पर्यूषण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म पर हुआ व्याख्यान

पर्यूषण पर्व में उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्ज़व धर्म के बाद चौथे दिन बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज ने...

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श्रावकों को संयम का मार्ग दिखाता है पर्यूषण पर्व : संयम की साधना में पंचेंद्रियों पर अंकुश आवश्यक -मुनिश्री विलोकसागर’

जैन दर्शन में प्राणी मात्र के कल्याण पर जोर दिया गया है। संसार के प्रत्येक प्राणी के अंदर अपार क्षमता है लेकिन, कषायों के वशीभूत होकर वह सब कुछ भूल चुका है।...

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मुनिश्री विबोधसागर ने कहा जैन दर्शन में त्रिरत्न ही सर्वाेपरि : बड़े जैन मंदिर में मधुर प्रवचन से हो रही धर्म प्रभावना 

श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में जैन संतों के आध्यात्मिक मंगल वर्षायोग में प्रतिदिन चल रही मधुर प्रवचनों की श्रृंखला में आचार्यश्री आर्जवसागरजी...

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मोह और आसक्ति मोक्ष मार्ग में अवरोध हैं-मुनिश्री विलोकसागर: मोह, आसक्ति और माया के जंजाल से निकलने का दिया मुनिश्री ने संदेश 

जैन दर्शन में मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है। जब तक हम मोह को नष्ट नहीं करेंगे, मोह का त्याग नहीं करेंगे, तब तक मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं...

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सांसारिक इच्छाओं, आसक्तियों का त्याग मोक्ष का कारक है-मुनिश्री विलोकसागर: मुनिश्री ने जीवन में त्याग की भावना को सर्वोपरि बताया 

जैन दर्शन में त्याग की महिमा का गुणगान किया गया है। त्याग की भावना रखने वाला प्राणी सदैव सुख शांति से जीवन यापन करता है। जैन धर्म में त्याग एक महत्वपूर्ण...

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