भगवान न किसी का अच्छा करते हैं, न किसी का बुरा करते हैं। भगवान न किसी को सुख देते हैं, न किसी को दुख देते हैं। यह सब तो प्राणी मात्र के कर्मों पर निर्भर करता...
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मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक प्राणी को अपने कर्मों के परिणामों से डरना चाहिए। भले ही वह ईश्वर...
बड़े जैन मंदिर में धर्म सभा के दौरान मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने कहा कि सांसारिक जीवन में सुख और दुख का चक्र घूमता रहता है। जब हमारे अच्छे कर्म उदय में आते...
यदि हमारे हृदय में करुणा का भाव नहीं हैं तो आपकी पूजा भक्ति कभी भी सफल नहीं हो सकती। यह उद्गार नगर में चातुर्मासरत जैन संत मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े...
पर्यूषण महापर्व के अंतर्गत शुक्रवार को बड़े जैन मंदिर में सांगानेर से पधारे पंडित सौरभ शास्त्री ने उत्तम आकिंचन्य धर्म की गहन व्याख्या की। इस दौरान नगर पालिका...
पर्यूषण पर्व में उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्ज़व धर्म के बाद चौथे दिन बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज ने...
जैन दर्शन में प्राणी मात्र के कल्याण पर जोर दिया गया है। संसार के प्रत्येक प्राणी के अंदर अपार क्षमता है लेकिन, कषायों के वशीभूत होकर वह सब कुछ भूल चुका है।...
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में जैन संतों के आध्यात्मिक मंगल वर्षायोग में प्रतिदिन चल रही मधुर प्रवचनों की श्रृंखला में आचार्यश्री आर्जवसागरजी...
जैन दर्शन में मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है। जब तक हम मोह को नष्ट नहीं करेंगे, मोह का त्याग नहीं करेंगे, तब तक मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं...
जैन दर्शन में त्याग की महिमा का गुणगान किया गया है। त्याग की भावना रखने वाला प्राणी सदैव सुख शांति से जीवन यापन करता है। जैन धर्म में त्याग एक महत्वपूर्ण...








