धर्मायतनों व समाजहितों के संरक्षण, संवर्धन हेतु सागर में जैन समाज का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन का आयोजन 12 अक्टूबर को होने जा रहा है । सम्मेलन में सहयोग हेतु...
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त्याग शब्द से ही पता लग जाता है कि इसका मतलब छोड़ना है और जीवन को संतुष्ट बना कर अपनी इच्छाओं को वश में करना है! यह न सिर्फ अच्छे गुणवान कर्मों में वृद्धि करता...
आत्मशुद्धि के उद्देश्य से विकार भाव छोड़ना तथा स्व-पर उपकार की दृष्टि से धन आदि का दान करना त्यागधर्म है। अतः भोग में लाई गई वस्तु को छोड़ देना भी त्याग धर्म...
आत्म शुद्धि के लिये इच्छाओं का रोकना तप है। मानसिक इच्छायें साँसारिक बाहरी पदार्थों मैं चक्कर लगाया करती हैं अथवा शरीर के सुख साधनों में केन्द्रिय रहती हैं।...
प्राणी संयम और इन्द्रिय संयम जीवन मैं अगर कर्मो की लगाम लगानी है तो संयम तो अपनाना ही पड़ेगा। प्राणी संयम सभी जीवो पर दया षट काय जीव की रक्षा करना। इन्द्रिय...
पिछली सदी के महान आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के विचार देव द्रव्य को लेकर बहुत स्पष्ट थे। उनका मानना था कि मंदिर में दिए गए दान की राशि का प्रयोग स्कूल के...
परदेशीपुरा में श्री दिगंबर जैन परदेशीपुरा समाज और दिगंबर जैन सोशल ग्रुप “वीर बाहुबली” द्वारा कैलाश मानसरोवर पर्वत की झांकी सजाई गई है। इसे देखकर...
पर्वराज पर्यूषण पर्व के अंतर्गत छत्रपति नगर स्थित दलाल बाग में महिला परिषद छत्रपति नगर द्वारा महिलाओं के लिए नगर स्तरीय स्वर संगम अंताक्षरी प्रतियोगिता का...
डोंगरगढ़। चंद्रनाथ जिनालय के द्वितीय वर्ष भी एक अनुपम प्रतिकृति (झांकी) देह से विदेह तक का आज अनावरण होने जा रहा है। इस झांकी के माध्यम से आचार्य श्री...
निज आत्मा पदार्थ जैसा स्वयं है वैसा जानना, देखना अथवा कहना उत्तम सत्य है। धर्म निज का भाव है अतः जिस ज्ञान अथवा वचन का स्वयं पर प्रभाव है वही उत्तम सत्य है।...








