Tag - त्याग

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स्व को जानने और जगाने का पर्वाधिराज है पर्युषण : तप, संयम और धर्म रक्षा के संकल्प को पूरा करते हैं श्रावक-श्राविकाएं 

जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण को लेकर समाजजनों में धार्मिक उल्लास तो है ही, साथ ही इस उत्साह के साथ इसका इंतजार किया जा रहा है कि अब यह वह समय है जब हम स्व को...

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आचार्य श्री ने किया केशलोचन, धर्मसभा में गूंजी वैराग्य की वाणी : ज्ञान आत्मा का दर्पण है -आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

टोंक नगर में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मंगल देशना देते हुए कहा कि ज्ञान आत्मा का दर्पण है जिसके द्वारा अपनी कमियों को सुधारा जा सकता...

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तप त्याग साधना और वात्सल्य मूर्ति गुरु माँ पूर्णमति माता जी: माता जी का जीवन तप, त्याग, समर्पण और सेवा का उत्कृष्ठ उदाहरण 

भारत वसुंधरा पर समय-समय पर अनेकानेक ऋषि मुनि तपस्वी दिव्य आत्माओं ने जन्म लेकर इस भूमि को धन्य किया है। जीवन को जीवंत किया है। नर से नारायण तीतर से तीर्थंकर...

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मेरे गुरु देव का गहन चिंतन मेरे लिए प्रेरणा: गुरु पूर्णिमा पर आचार्यश्री विद्यासागर जी के विचार प्रेरणादायक 

मेरे गुरुदेव नीचे देखते हुए वह पूरी धरती को देख लेते हैं। हमारे अंदर दृष्टि से ही ममत्व भाव शांति का संचार कर देते हैं। जिनके तपों बल से तपस्या से हम शुरू से...

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श्री नंदीश्वर दीप मंडल विधान आरंभ: श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से किया पूजन 

अष्टाह्निका महापर्व पर गुरुवार से महिला मंडल राजेंद्रनगर के तत्वावधान में श्री नंदीश्वर दीप मंडल विधान का पूजन अनिता दीदी के सानिध्य में प्रारंभ हुआ। बडे़ ही...

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आभास हैं तो पिता आकाश भी है: पितृ दिवस पर अपने पिताश्री को समर्पित काव्यांजलि 

जैन धर्म और धर्मशास्त्रों के अनुसार संयम, त्याग, समर्पण और सेवा के लिए हमारे साधु-संतों की दिव्य वाणी में संदेश होता है। अब आप देखिए पिता क्या हैं? उनको...

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मां को भी मां की जरूरत होती है: बेटी के रूप में मां को समर्पित कविता 

आज समूचा विश्व मातृ वंदना कर रहा है। मातृ वंदना के लिए संदर्भ की नहीं सदभाव की जरूरत है क्योंकि, मां ममत्व, त्याग, समर्पण और दृढ़ता की प्रतिमूर्ति है। मां...

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संयम दीक्षा धारण करने से सच्चा सुख मिलता है-मुनि हितेंद्र सागरजीः आचार्य वर्धमान सागरजी धर्म प्रभावना कर रहे हैं।

साधुओं की जन्म एवं कर्म भूमि धर्मनगरी मुंगाणा में आचार्य वर्धमान सागरजी ससंघ विराजित है। श्रावक-श्राविकाओं के संस्कार शिविर का आयोजन चल रहा है। जिसमें हितेंद्र...

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स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः श्री महायशमति ने श्रावक का अर्थ प्रतिपादित किया

प्रमादमय स्त्रियों को प्रमादमय मूर्तियों की उपमा दी गई है, अर्थात स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है, जिस प्रकार मिट्टी की मूर्ति में मिट्टी की बहुलता...

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