श्री अतिशय क्षेत्र नांदणी से सिद्धक्षेत्र कुंथलगिरी और वापस नांदणी तक स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी का 50 दिनों में 715 किमी का पद विहार पूर्ण हुआ। श्री अतिशय क्षेत्र वृषभाचल से श्री सिद्धक्षेत्र कुंथलगिरी जिन प्रभावना पद विहार पूरा होने पर स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जी के सानिध्य में मंगलवार को नांदणी मठ में संगीतमय भगवान देशभूषण, कुलभूषण कथा कथन उत्साह से हुआ। नांदणी से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
नांदणी। स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी का नांदणी से कुंथलगिरी और कुंथलगिरी से नांदणी तक पद विहार 23 जून को संपन्न हुआ। नांदणी के स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी नांदणी से पद विहार करते हुए जयसिंगपुर, चिपरी पंचकल्याणक, कुंभोज, दूधगांव पंचकल्याणक, समडोली, डिग्रज,नांद्रे,कळंबी पंच कल्याणक कर के कुंथलगिरी पहुंचे। वहां उन्होने विधान और शिविर का आयोजन किया। श्री अतिशय क्षेत्र नांदणी से सिद्धक्षेत्र कुंथलगिरी और वापस नांदणी तक स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी का 50 दिनों में 715 किमी का पद विहार पूर्ण हुआ।
नांदणी मठ के आधिपत्य में दक्षिण महाराष्ट्र और उत्तर कर्नाटक के 743 गांव समाविष्ट है। इन सभी गांव में जैन धर्म के सभी धार्मिक महोत्सव, विधि-विधान, पंचकल्याणक, धर्म का प्रसार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामीजी के आदेश और आशीर्वाद से होते हैं। इस मठ द्वारा नूतन जिनालयों की निर्मिती, प्राचीन जिनालयों का जीर्णाेद्धार, धार्मिक साहित्य की निर्मिती का कार्य, धर्म प्रसार एवं समस्याओं ंका समाधान स्वस्तिश्री जिनसेन स्वामीजी के मार्गदर्शन से किया जाता है। नांदणी मठ की सार्वधर्म मासिक पत्रिका के माध्यम से जैन तत्त्वज्ञान का प्रचार-प्रसार कार्य होता है। जैन धर्म के विकास और संरक्षण के लिए भारतवर्ष में भट्टारक पीठों की निर्मिती हुई है।
इन सभी भट्टारक पीठों में स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी मठ संस्थान नांदणी, करवीर (कोल्हापुर) यह आद्य पीठ है। प्राचीन भारत के दिल्ली, पिंनगोंडी, जिनकंची और करवीर (नांदणी) में ऐसी जिनसेन मठ की परंपरा चलती आ रही है। करवीर मठ संस्थान के कोल्हापुर, नांदणी, तेरदाळ और बेलगांव यह चार शाखा पीठ हैं। इसलिए जिनसेन मठ की वास्तु अतिभव्य है। नांदणी स्थित मठ का इतिहास 1300 वर्ष पुराना है। श्री अतिशय क्षेत्र वृषभाचल से श्री सिद्धक्षेत्र कुंथलगिरी जिन प्रभावना पद विहार पूरा होने पर स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जी के सानिध्य में मंगलवार को नांदणी मठ में संगीतमय भगवान देशभूषण, कुलभूषण कथा कथन उत्साह से हुआ।













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