
सम्मेद शिखर पर श्रीफल जैन न्यूज़ की मुहिम ,जैन समाज के शिखर पुरुषों से संवाद
श्रीफल जैन न्यूज़ संवाददाता – राजकुमार जी, सम्मेद शिखर को लेकर आंदोलन कर रहे हैं । मेरा सीधा सवाल क्या धार्मिक क्षेत्र में विकास नहीं होना चाहिए ?
राजकुमार कोठ्यारी-(अध्यक्ष, तीर्थक्षेत्र कमेटी राजस्थान अंचल)- आपने सीधा सवाल पूछा है तो मेरा इस मामले में सीधा जवाब है – ‘नहीं’ । सम्मेद शिखर आज से नहीं हजारों सालों से हमारी आस्थाओं का केन्द्र हैं । जैन समाज के 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों को मोक्ष यहां मिला है । हमारे लिए ये तपोभूमि स्वर्ग के समान है । स्वर्ग में कोई विकास क्या करवाएगा ? जो जैसा है वहीं सर्वोत्तम है । वहां भौतिक नहीं लोगों का आध्यात्मिक विकास होता है । वो जितना चाहें करवाए सरकार ।
श्रीफल न्यूज़ संवाददाता – सरकार अगर वहां लोगों की सुविधा के लिए आगे आ रही है तो क्या सरकार गलत है ?
राजकुमार कोठ्यारी-(अध्यक्ष, तीर्थक्षेत्र कमेटी राजस्थान अंचल)- क्या पूरे हिन्दुस्तान में विकास पूरा हो गया जो आप सम्मेद शिखर के क्षेत्र में विकास की बात कर रहे हो । क्या केवल यही जगह बची है । सालों से नहीं सदियों से जिस भूमि को जैन धर्मावलंबियों ने सुरक्षित और संरक्षित रखा है । उस पावन शिखर पर हम न खाना ले जाते हैं और न हीं वाहन । नंगे पैर हम शिखर जी पर जाते हैं । यहां तक की लघुशंका भी नीचे ही करके शिखर जी जाते हैं । वो तपोभूमि है हमारे तीर्थंकरों की ।
इस तपोभूमि के बारे में सरकारें सब जानती हैं । पता नहीं क्यों और कैसे इसे लेकर योजनाएं बना ली । न हमनें मांग की और न करेंगे । इसकी प्राकृतिकता ही इसका सौंदर्य है । हम दोहन करने वाले नहीं, संरक्षण करने वाले हैं । सरकार और संविधान के कानून बनने से पहले ही जैन समाज प्रकृति की इस अनुपम देन को संभाले हुए हैं । शिखर जी की गोद में हम आध्यात्मिकता की खोज करते हैं ।
श्रीफल न्यूज़ संवाददाता – देखिए प्राकृतिक अवस्था तो अब भी उसी स्वरूप में नहीं है । लेकिन इस दौर की बात करेंगे, क्या मूल समस्या है, अगर पवित्रता बनी रहे और पर्यटन भी हो ।
राजकुमार कोठ्यारी-(अध्यक्ष, तीर्थक्षेत्र कमेटी राजस्थान अंचल) – ये आध्यात्मिक स्थान है । आध्यात्मक स्थान में शांति अनिवार्य है । पवित्रता को हम किसी भी कीमत पर खत्म होने नहीं देगे । लेकिन पर्यटन से हैलीकॉप्टर आएंगे, रिसोर्ट खुलेंगे, फैक्ट्रियां और वाहन चलेंगे । उस भूमि और वातावरण में शोर बढ़ेगा । ध्वनि प्रदूषण जहां दुनिया भर के लिए मुद्दा बन रहा है । इसे कम करने की बात हो रही है और यहां प्राकृतिक रुप से शांति है और सरकारें इसे योजनाबद्ध तरीके से यहां की शांति भंग करना चाहेगी तो कैसे होने देंगे ।
श्रीफल जैन न्यूज़ – आंदोलन का नेतृत्व किसके हाथ में हैं ?
राजकुमार कोठ्यारी-(अध्यक्ष, तीर्थक्षेत्र कमेटी राजस्थान अंचल) – जैन समाज का जन-जन सम्मेद शिखर के प्रति आस्था व समर्पण का भाव रखता है । उन्हीं ने आंदोलन की कमान संभाले रखी है । सरकार कहे कि बात करनी है, एक घंटे में प्रतिनिधिमंडल मिल जाएगा, वो कोई बड़ी बात नहीं । हमारा आंदोलन अहिंसक है लेकिन बेअसर नहीं । सरकारों को इस बात को समझना होगा ।












