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प्राणी-रक्षण और इन्द्रिय दमन करना संयम है : उत्तम संयम धर्म के दिन सुगंध दशमी पर्व उत्साहपूर्वक मनाया गया


नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी के निर्देशन में बड़ी भक्ति भाव से मनाए जा रहे पर्युषण पर्व के छठे दिन प्रातः बड़े मंदिर जी एवं संत निलय में पंचामृत अभिषेक पूजन किया गया, साथ ही आज शांतिधारा का सौभाग्य शार्विल संजना – साहिल जैन परिवार एवं बड़ा मंदिर जी में बड़ा अभिषेक करने का  सौभाग्य कल्याण कुमार भाई कमल कुमार केके परिवार को प्राप्त हुआ। पढ़िए सन्मति जैन की विशेष रिपोर्ट…


सनावद। नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी के निर्देशन में बड़ी भक्ति भाव से मनाए जा रहे पर्युषण पर्व के छठे दिन प्रातः बड़े मंदिर जी एवं संत निलय में पंचामृत अभिषेक पूजन किया गया, साथ ही आज शांतिधारा का सौभाग्य शार्विल संजना – साहिल जैन परिवार एवं बड़ा मंदिर जी में बड़ा अभिषेक करने का  सौभाग्य कल्याण कुमार भाई कमल कुमार केके परिवार को प्राप्त हुआ। सन्मति काका ने बताया कि इसी कड़ी में आर्यिका माताजी ने अपनी उत्तम संयम धर्म पर अपनी अमृत  वाणी का रसपान करवाते हुए कहा कि प्राणी-रक्षण और इन्द्रिय दमन करना संयम है।

स्पर्शन, रसना, घ्राण, नेत्र, कर्ण और मन पर नियंत्रण करना इन्द्रिय-संयम है। पृथ्वीकाय, जलकाय, अग्निकाय, वायुकाय, वनस्पतिकाय और त्रसकाय जीवों की रक्षा करना प्राणी संयम है इन दोनों संयमों में इन्द्रिय संयम मुख्य है क्योंकि इन्द्रिय संयम प्राणी संयम का कारण है, इन्द्रिय संयम होने पर भी प्राणी संयम होता हैं, बिना इन्द्रिय संयम के प्राणी संयम नहीं हो सकता। इन्द्रियाँ बाह्म पदार्थों का ज्ञान कराने में कारण है, इस कारण तो वे आत्मा के लिये लाभदायक हैं क्योंकि संसारी आत्मा इन्द्रियों के बिना पदार्थों को जान नहीं सकता। पँचेन्द्रिय जीव की यदि नेत्र-इन्द्रिय बिगड़ जावे तो देखने की शक्ति रखने वाला भी आत्मा किसी वस्तु को देख नहीं सकता।

आर्यिका अनंत  मति माताजी ने धूप दशमी का महत्म बताते हुए कहा कि भाद्रपद में शुक्‍ल पक्ष की दशमी को यह पर्व मनाया जाता है। इसे सुगंध दशमी अथवा धूप दशमी कहा जाता है। जैन मान्‍यताओं के अनुसार पर्युषण पर्व के अंतर्गत आने वाली सुगंध दशमी का काफी महत्‍व है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से मनुष्य के अशुभ कर्मों का क्षय होकर पुण्‍य बंध का निर्माण होता है तथा उन्हें स्वर्ग, मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दौरान जैन मंदिरों में जाकर भगवान को धूप अर्पण करते हैं। जिसे धूप खेवन भी कहा जाता है, जिससे सारा वायुमंडल सुगंधमय होकर, बाहरी वातावरण स्‍वच्‍छ और खुशनुमा हो जाता है।

इस अवसर पर सनावद के सभी जैन मंदिरों सहित णमोकार धाम ,सिद्धाचल पोदनपुरम एवं ओंकारबाग मोरटक्का में सभी समाजजनों ने बड़े भक्ति भावों से धूप खेवन कर धूप दशमी का पर्व मनाया। इसी क्रम में दोपहर में आयोजित आर्यिका माताजी के सानिध्य में जिनवाणी पूजन करने का सौभाग्य अर्चना आलोक कुमार जैन, साधना वीरेंद्रकुमार मुंशी एवं पुष्पा सुनील कुमार पांवणा परिवार को प्राप्त हुआ।

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