श्रमण मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि कर्म और मन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हमारी सारी शक्तियों के पीछे कर्म का उदय है। यदि हमें नरक जाना है तो दुर्गति कराने के लिए धर्म से अलग रहो। पढ़िए राजीव सिंघई और शुभम जैन की रिपोर्ट…
आगरा। श्रमण मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि कर्म और मन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हमारी सारी शक्तियों के पीछे कर्म का उदय है। यदि हमें नरक जाना है तो दुर्गति कराने के लिए धर्म से अलग रहो। अपने मन को पकड़िए, उसे रोकिए। किसी के बहकावे में मन 23 घंटे रहेगा तो मंदिर में एक घंटे कैसे कंट्रोल करेंगे।

संकट पर डिगो नहीं
जितने भी संकट देखे वह धर्मात्मा पर आए। रामचन्द्रजी पर पग-पग पर संकट आते हैं लेकिन वे डिगे नहीं। धर्म के रास्ते पर चलिए। पूरी फिल्म में हीरो पिटता है। खलनायक पूरी फिल्म में आराम से रहता, खुश रहता है इसलिए अंत मे पिटता है। हमारा विरोधी जो होता है वह हमे मूर्ख कहता है। हमें ‘मूर्ख को बीजाक्षर को म उ र ख में बीजाक्षर को मंत्र बना लो हमारा कल्याण हो जाएगा

पिता की बात बेटा नहीं मान रहा
मन मे ऐसे विचार क्यों आते है जो नही आने चाहिए। हमारी आंख वही उठ जाती है जहां उठनी नही चाहिए। जबकि आंख हमारी है मन हमारा है, विचार गंदे है कौन है ऐसा जो हमारे मन को हमारे विपरीत चला रहा है। इसको कौन मागदर्शन दे रहा है। पिता की बात बेटा नहीं मान रहा है। इसका मतलब बेटे की गलती है। तीन बार थप्पड़ मारने का अधिकार है। तीन बार थप्पड़ मारने के बाद में सोचना कि ये किसी के बहकावे में आ गया। कोई न कोई इसके पीछे है।













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