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मंगल कलश स्थापना में उमड़ा जैन सैलाब : वर्षायोग कलश स्थापना श्रावकों का आध्यात्मिक आयोजन


मुनिश्री विबोधसागर महाराज ने कहा कि वर्षायोग कलश स्थापना श्रावकों द्वारा किया जाने वाला एक आध्यात्मिक आयोजन है क्योंकि, साधुजन तो चतुर्दशी के दिन ही चातुर्मास प्रतिष्ठापन कर लेते हैं। मंगल कलश स्थापना का आयोजन नगर एवं समाज में प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता के उद्देश्य से किया जाता है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना। वर्षाकाल के चार माह एक ही स्थान पर रुककर अहिंसा धर्म का पालन करते हुए संयम की साधना करना, स्वाध्याय करना, आत्मकल्याण हेतु लोगों को प्रेरित करना एवं उपदेश देना, जप तप व्रत उपवास, अनुष्ठान करते हुए पापों का क्षय करना ही चातुर्मास कहलाता है। हमने भी वर्षाकाल के चार माह नगर में रुकने का संकल्प लिया है लेकिन, हमारी संयम की साधना में व्यवधान उत्पन्न होने अथवा आगम में वर्णित कथनों के विपरीत स्थितियां उत्पन्न होने की स्थिति में हम चारों दिशाओं में तीस-तीस किमी विहार कर सकते हैं। साधु संतों के साथ साथ श्रावकों को भी इन चार माह में आत्मकल्याण हेतु साधना, साधुओं की चर्या में सहभागिता एवं स्वाध्याय आदि करना चाहिए। यह उद्गार बड़े जैन मंदिर में चातुर्मासरत मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने वर्षायोग कलश स्थापना दिवस पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर मुनिश्री विबोधसागर महाराज ने कहा कि वर्षायोग कलश स्थापना श्रावकों द्वारा किया जाने वाला एक आध्यात्मिक आयोजन है क्योंकि, साधुजन तो चतुर्दशी के दिन ही चातुर्मास प्रतिष्ठापन कर लेते हैं। मंगल कलश स्थापना का आयोजन नगर एवं समाज में प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता के उद्देश्य से किया जाता है। श्रावकों द्वारा आयोजित इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जैन-अजैन सभी को वर्षायोग से जोड़ना होता है, ताकि सभी लोग वर्षाकाल के चार माह तक मुनिराजों की संयम साधना, आहार, विहार, वैयावृति एवं प्रवचन, स्वाध्याय के माध्यम से अपने कल्याण हेतु संयम मार्ग की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त कर सकें।

कलश स्थापित करने वाले पुण्यशाली श्रावक

आध्यात्मिक पावन वर्षायोग समारोह में मुख्य प्रथम कलश प्रशांतकुमार दिव्यांश मोनू जैन (टायर वाले) एवं मुख्य द्वितीय कलश पवनकुमार सिद्धार्थ ध्रुव जैन (पोरसा वाले) को स्थापित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। अन्य कलश प्रेमचंद पंकज जैन, प्राचार्य अनिल जैन, संजय रोबिन जैन, बनवारी महेशचंद जैन, पदमचंद पलाश जैन, राकेशकुमार प्रदीप जैन, महावीरप्रसाद विमल जैन, राजेंद्रप्रसाद अतुल जैन, शशि पदमचंद जैन, मसूलआई परिवार राहतगण, आशीष मिथुन जैन, विमलकुमार अमन जैन, मुकेश रोहित जैन, सुरेंद्र सोनी जैन, ओमवती सुनील जैन, आशीष जैन, डॉ. अभिलाषा मनोज जैन, राजकुमार सुनील वरैया, शांतिलाल दिनेशचंद जैन, सुभाष चंद जैन, वीरेंद्र जैन बाबा, मूलचंद मनीष जैन सहित अनेकों श्रावकों, साधर्मी बंधुओं को स्थापित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

जिनाभिषेक एवं भक्तामर विधान का हुआ आयोजन

परम पूज्य मुनिश्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विविधसागर महाराज के पावन सान्निध्य में प्रातःकालीन वेला में स्याद्वाद युवा क्लब द्वारा सामूहिक मासिक जिनाभिषेक किया गया। क्लब के सभी सदस्यों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में अत्यंत ही भक्ति एवं श्रद्धा के साथ जिनेंद्र प्रभु का जलाभिषेक किया। जैन मिलन बालिका मंडल ने 48 मंडलीय श्री 1008 भक्तामर विधान का आयोजन किया। विधानाचार्य संजय भैयाजी एवं अजय भैयाजी ने भक्तामर के प्रत्येक श्लोक का वाचन करते हुए अर्घ्य समर्पित कराए। विधान के सभी 48 माढ़नों पर चार चार साधर्मी बंधु अर्घ समर्पित कर रहे थे। जैन मिलन बालिका मंडल की सभी सदस्याएं अपनी पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित होकर भक्ति एवं श्रद्धा के साथ नृत्य करते हुए भक्तामर विधान की आराधना कर रही थीं। समाज के सभी लोगों ने बालिकाओं के इस पुनीत कार्य की सराहना की।

आगंतुक अतिथियों का हुआ बहुमान

मंगल कलश स्थापना समारोह के पावन अवसर पर सकल जैन समाज मुरैना की ओर से वर्षायोग समिति के मुख्य संयोजक राजेंद्र जैन दयेरी एवं मंदिर कमेटी के अध्यक्ष प्राचार्य अनिल जैन के नेतृत्व में समाज के श्रावक श्रेष्ठियों ने दिल्ली, झांसी, राहतगढ़, दमोह, सागर, इंदौर, जौरा सहित संपूर्ण भारतवर्ष से पधारे हुए अतिथियों का स्वागत सम्मान किया गया। आध्यात्मिक पावन वर्षायोग मंगल कलश स्थापना की सभी धार्मिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी मुरैना वाले, संघस्थ ब्रह्मचारी संजय भैयाजी बम्होरी, ब्रह्मचारी अजय भैयाजी झापन तमूरा दमोह, संजय शास्त्री सिहोनिया ने मंत्रोचारण के साथ संपन्न कराई। इस अवसर पर चक्रेश शास्त्री एवं नवनीत शास्त्री ने पूर्ण सहयोग प्रदान किया। जैन मिलन बालिका, नन्हें मुन्ने बच्चों एवं अन्य ग्रुपों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम के शुभारंभ में पदमचंद चौधरी द्वारा मंगलाचरण बाहर से पधारे हुए अतिथियों द्वारा चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं झांसी से आए हुए गुरु भक्तों द्वारा शास्त्र भेंट किए गए।

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