भारत के साथ-साथ जैन धर्म का प्रसार विदेशों में भी हो रहा है। विदेशी लोग भी जैन धर्म के सिद्धांतों और जीवनशैली को अपनाने में रुचि रख रहे हैं। इसी उद्देश्य से 11जिज्ञासुओं का समूह आकर्ष जैन के संयोजन में जैन मुनियों की आहार चर्या और उनकी दिनचर्या देखने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए नांद्रे आया था। कोल्हापुर से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
कोल्हापुर। भारत के साथ-साथ जैन धर्म का प्रसार विदेशों में भी हो रहा है। विदेशी लोग भी जैन धर्म के सिद्धांतों और जीवनशैली को अपनाने में रुचि रख रहे हैं। इसी उद्देश्य से 11जिज्ञासुओं का समूह आकर्ष जैन के संयोजन में जैन मुनियों की आहार चर्या और उनकी दिनचर्या देखने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए नांद्रे आया था। इस समूह में भारत के अलावा बांग्लादेश, यूके और अमेरिका के भी प्रतिभागी थे। नांद्रे में देश विदेश से पधारे इन भक्तों का बेंडबाजे से धूमधाम से स्वागत किया गया। नांद्रे के श्रावक-श्राविका द्वारा उन्हें तिलक लगाकर पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया। यह समूह इंटरनेशनल स्कूल फॉर जैन स्टडीज, पुणे द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय समर स्कूल के अंतर्गत इसके डायरेक्टर डॉ.श्रीनेत्र पाण्डेय के नेतृत्व में नांद्रे पहुंचा था।
प्रतिभागियों में यह रहे शामिल
इन 11 प्रतिभागियों में प्रज्ञा जैन, आकर्ष जैन, अशोक जेतावत, तृषा झा, पुनीत तिवारी, सुवर्णा जैन, पल्लवी जैन, गौरवसिंह राठौर, प्रीति गुजर, ओनन्ना अख्तर (बांग्लादेश), रूथ वेस्टबी (यूके), मेरिसा गोमेज (अमेरिका) थे।
मंदिरों के दर्शन कर जाना इतिहास
नांद्रे में मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, जयंत सागर जी महाराज, सिद्ध सागर जी महाराज और श्रुत सागर जी महाराज के दर्शन करके विविध धार्मिक विषयों पर चर्चा हुई। जैन धर्म के सिद्धांतों और अहिंसा के मार्ग में विदेशी लोगों की रुचि थी। मुनि श्री सारस्वत सागर जी ने विदेश से आए भक्तों को प्रवचन देकर उनकी शंका का समाधान किया। नांद्रे, कागवाड़, बाहुबली, नांदणी और कोल्हापुर के जैन मंदिरों के दर्शन करके यहां के इतिहास को जानकर उन्हें बहुत प्रसन्नता हुई। नांदणी के जिनसेन भट्टारक महास्वामी जी और कोल्हापुर के लक्ष्मीसेन भट्टारक स्वामीजी के साथ विविध विषयों पर उन्होंने चर्चा की।













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