मुनिश्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि तीर्थ कहीं भी हो, सबका होता है। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट..
महरौनी(ललितपुर)। सोना कहीं भी हो, वह सोना ही रहता है। ऐसे ही तीर्थ कहीं भी हो, वह सबका होता है। तीर्थ क्षेत्र की माटी ही अतिशयकारी होती है। ये मंगल वचन मुनिश्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित हुऐ कहे। उन्होंने कहा कि अर्जुन सत्य था तो एकलव्य सत्य से ऊपर था। सब कुछ समर्पण के बाद भी भक्त अपना अहोभाग्य माने, वही भक्ति है। प्रभु भक्ति से हस्तरेखा भी परिवर्तित हो जाती है। भक्त का और प्रभु का संबंध उसी प्रभात के सूर्य और कमल के समान है। आगम कहता है कि भगवान नहीं सुनते पर भक्त कहता है कि भगवान सुनते हैं। सत्य से ऊपर उठना ही भक्ति है।सत्य के प्रभाव से मन के विश्वास से सर्प भी हार में परिवर्तित हो जाता है।
इससे पहले यशोदय तीर्थ में प्रातःकालीन बेला में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में जिन अभिषेक और शांतिधारा हुई, जिसका सौभाग्य चक्रेश चौधरी,कविता जबलपुर,डां रश्मि जैन दिल्ली, ऋषभ जैन कोटा और सुभाष साढूमर को प्राप्त हुआ। मुनिश्री सुधासागर महाराज को आहार देने का सौभाग्य सौभाग्य निशांत जैन वरगया और क्षुल्लक गम्भीर सागर को आहार सुभाष साढूमल को प्राप्त हुआ। यशोदय तीर्थ में आयोजित श्री पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समोशरण विधान में माता-पिता बनने का सौभाग्य आनंद सराफ और स्नेहलता सराफ को प्राप्त हुआ।शाम को मुनिश्री द्वारा भक्तों की जिज्ञासा का समाधान किया गया और श्रावकजनों ने मुनिश्री की मंगल आरती की।













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