दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिनपवित्रमति माताजी के सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ नेमिनाथ व 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर मैं शांति धारा व अभिषेक हुआ।अभिषेक के बाद चातुर्मास पंडाल में विराजमान श्री जी की प्रतिमा का अभिषेक किया गया। पढ़िए सुरेश चंद्र गांधी की रिपोर्ट…
नौगामा। दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिनपवित्रमति माताजी के सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ नेमिनाथ व 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर मैं शांति धारा व अभिषेक हुआ।अभिषेक के बाद चातुर्मास पंडाल में विराजमान श्री जी की प्रतिमा का अभिषेक किया गया। अभिषेक करने का प्रथम सौभाग्य नानावटी श्रीपाल बदामीलाल को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर पवित्रमति माताजी के सानिध्य व मुंगावली से पधारे मोनु भैया जी और रमेश चंद्र गांधी के दिशा निर्देशन में भगवान नेमिनाथ का विधान किया गया। बड़े भक्ति भाव से पुरुष एवं महिला द्वारा गरबा नृत्य करते हुए अर्घ्य चढ़ाए गए एवं साथ ही दशलक्षण विधान के अर्घ्य चढ़ाकर दशलक्षण की पूजन, 16 कारण पूजन सरस्वती पूजन की गई। इस अवसर पर महिलाएं केसरिया वस्त्रों में एवं पुरुष सफेद वस्त्रों में विधान में शामिल थे।
मार्दव धर्म पर अपनी प्रवचन में माताजी ने कहा कि मार्दव का अर्थ है मृदुता या नम्रता। हमें मृदुता से जीवन जीना है। दोपहर में सरस्वती विधान एवं तत्वार्थ सूत्र का वचन हुआ व उनका अर्थ बताया गया। शाम को आचार्य भक्ति, प्रतिक्रमण, आरती के बाद राशि दीदी द्वारा प्रवचन किए गए एवं जैन पाठशाला के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। अभी दशलक्षण के उपलक्ष्य में यहां संस्कार शिविर चल रहा है, जिसमें शिविरार्थी द्वारा उपवास किए जा रहे हैं एवं अन्य धर्म प्रेमी बंधुओं द्वारा 5, 10 ,16 उपवास चल रहे हैं।













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