श्रीफल जैन न्यूज की ओर से इंदौर जैन समाज के चुनाव को लेकर कराए सर्वे में 286 लोगों ने भाग लिया। इस सर्वे में धार्मिक नेता नहीं, बल्कि आम श्रावक शामिल थे। सर्वे में 85 प्रतिशत लोगों ने एक चुनाव के पक्ष में अपनी राय दी। 7.5 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि चुनाव अलग-अलग हों। 52.5 प्रतिशत लोग दोनों संसदों का समर्थन करते हैं, जबकि 22.5 प्रतिशत लोग कीर्ति स्तंभ और 25 प्रतिशत लोग शीश महल को समर्थन देते हैं। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। हम तो समय बिता रहे हैं, लेकिन लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि हमने प्रयास किया है। बाहर से लोग एक-दूसरे के खिलाफ बुराई करते हैं। वास्तविकता यही है कि एक अध्यक्ष के चुनाव का आयोजन संभव नहीं लगता। जो समन्वय बैठकों का आयोजन हो रहा है, वह भी नाटकीय प्रतीत हो रहा है, क्योंकि हर बार ऐसी बैठक में कुछ व्यक्ति बदल जाते हैं। सभी अपने-अपने पदों को बचाने में लगे हैं। दो संसदों को चाहिए कि वे अपने-अपने चुनाव कर लें और अपने-अपने काम में लग जाएं क्योंकि 125 मंदिरों और चैत्यालयों में से लगभग 70 से 80 मंदिरों ने दोनों संसदों को अपनी प्रतिनिधि सूची सौंप दी है। ऐसा इसलिए हुआ है कि दोनों संसदों ने मंदिरों के लिए कोई विशेष कार्य नहीं किया है। अब मंदिरों को अपना काम खुद करना है। तो फिर मंदिर वाले किसी से बुराई क्यों लें? यह बातें श्रीफल जैन न्यूज की ओर से इंदौर जैन समाज के चुनाव को लेकर कराए सर्वे में निकल कर सामने आईं। इस सर्वे में 286 लोगों ने भाग लिया। इस सर्वे में धार्मिक नेता नहीं, बल्कि आम श्रावक शामिल थे। सर्वे में 85 प्रतिशत लोगों ने एक चुनाव के पक्ष में अपनी राय दी। 7.5 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि चुनाव अलग-अलग हों। 52.5 प्रतिशत लोग दोनों संसदों का समर्थन करते हैं, जबकि 22.5 प्रतिशत लोग कीर्ति स्तंभ और 25 प्रतिशत लोग शीश महल को समर्थन देते हैं।
इंदौर जैन समाज धार्मिक, सामाजिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से प्रगति चाहता है। इस प्रकार कोई समाधान निकल सकता है।”
समाधान के प्रस्ताव:
-इंदौर के सभी मंदिरों के अध्यक्ष और महामंत्री से वोट करवाएं कि वे किस संसद का समर्थन करते हैं।
-संविधान में बदलाव की प्रक्रिया के अनुसार, संसद के अध्यक्ष का चुनाव मंदिरों के अध्यक्ष और मंत्री के वोट से हो।
-इंदौर में जितनी भी जैन समाज की शाखाएं हैं, जैसे खंडेलवाल, जैसवाल, परवार आदि, उन समाजों के लोग एकत्र होकर तय करें कि वे किस संसद का समर्थन करेंगे।
-संविधान में बदलाव कर इंदौर जैन समाज के हर सदस्य को वोट देने का अधिकार दिया जाए ताकि वे संसद का अध्यक्ष चुन सकें। हालांकि, यह अभी संभव नहीं है, इसके लिए एक वर्ष का समय चाहिए ताकि वोटर लिस्ट तैयार की जा सके। इस बीच महावीर जयंती और क्षमावाणी पर्व का नेतृत्व कांच मंदिर कर ले । यह सुझाव है
अगर यह सब संभव नहीं है, तो कृपया उचित रास्ता सुझाएं।













Add Comment