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भगवान महावीर के बाद उग्रतम साधना करने वाले पहले सन्त दिगम्बर जैन संत अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी गुरुदेव के 500 उपवास पू

-28 जनवरी को होगा महापारणा महोउत्सवर्ण,.. भक्तों में उत्साह

सम्मेदशिखर जी-:- आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी कहते है कि अगर आप किसी भी काम में पूरी तन्मयता से डूब जाते हैं, तो समझो जीवन मे आध्यात्मिक प्रक्रिया वहीं शुरू हो जाती है। …..इसी आध्यात्मिक से अपने तन, मन और जीवन को तप साधना में समर्पित करने वाले तीर्थंकर मार्गी अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज का 500वां सिंह निष्क्रीड व्रत दो दिसंबर को पूर्ण हो गया है।

गुरुदेव के उपवास निर्विघ्न पूर्ण होने पर भक्तो में अपार उत्साह है।….. कहते है ना कि गुरु समस्त मंत्रों का मूल गुरु है और गुरु ही परम तप है। गुरु की प्रसन्नता मात्र से शिष्य सिद्धि को प्राप्त कर लेता है। गुरु की कृपा से शक्ति प्रसन्न होती है और शक्ति की प्रसन्नता से मोक्ष प्राप्त होता है। ऐसे गुरु जिनकी साधना मात्र से भक्तो का पुण्य प्रबलता की और बढ़ रहा हो तो भक्तो की खुशी अपने आप अंतर्मन से उत्साहित हो जाती है।

इसी उत्साह को आत्मा अनुभूति की ओर ले जाने के लिए भक्त गुरुदेव के 500 उपवास पूर्ण होंने पर व आगामी होने वाले उपवासों की सफलता के लिए मंत्र जाप, आरती, पाठ व व्रत की सफलता की कामना करेंगे।

प्रवक्ता रोमिल जैन सोनकच्छ व नरेंद्र अजमेरा, पीयूष कासलीवाल औरंगाबाद ने बताया कि जैन धर्म के सबसे बड़े तीर्थ शिखर जी की 20 पंथी कोठी में ससंघ विराजमान अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज अपने उपवास की साधना में लीन है। उन्हीं के शिष्य सौम्य मूर्ति मुनि पीयूष सागर जी महाराज के सानिध्य में गुरुदेव के उपवास काल मे प्रतिदिन जिनेंद्र भक्ति कराई गई। यहां सुबह जिनसहस्त्र नाम पूजा, कलशाभिषेक, शन्तिधारा, प्रवचन व शाम को गुरुभक्ति आरती का लाभ भक्तो को मिल रहा है।

आगामी 27 जनवरी को गुरुदेव के 557 दिन के मौन तप सिंह निष्क्रीड साधना पूर्ण हो रही है। इस दिन उनका महा पारणा कराया जाएगा जिसे लेकर तैयारी पूर्ण है। पारणा दिवस पर गुरुदेव की एक झलक पाने को भक्तो का तांता लगा हुआ है। भक्तो के प्रेम समर्पण को अपने ह्रदय में विराजमान कर गुरुदेव भी समय समय पर अपना आशीर्वाद भक्तों को प्रदान कर रहे हैं।
मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा, विवेक गंगवाल कोलकाता

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