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महायज्ञ रथयात्रा के साथ सिद्धचक्र विधान का समापन: युगल मुनिराजों के सानिध्य में भव्य आयोजन


सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन की वेला में विश्व शांति एवं कल्याण की पावन भावना के साथ महायज्ञ कर भव्य एवं विशाल रथ यात्रा निकाली गई। महायज्ञ एवं रथयात्रा के अवसर पर जैन मंदिर में उत्सव जैसा माहौल था। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना। सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन की वेला में विश्व शांति एवं कल्याण की पावन भावना के साथ महायज्ञ कर भव्य एवं विशाल रथ यात्रा निकाली गई। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के संयोजक अनूप जैन भंडारी ने बताया कि महायज्ञ एवं रथयात्रा के अवसर पर जैन मंदिर में उत्सव जैसा माहौल था। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में 8 दिन निरंतर सिद्धों की आराधना करने वाले समस्त इंद्र इंद्राणी, श्रावक श्राविकाएं अपने विशेष परिधान में हार-मुकुट से सुसज्जित महायज्ञ के कुंडों के इर्द-गिर्द बैठकर प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी मुरैना एवं संघस्थ ब्रह्मचारी संजय भैयाजी बम्होरी द्वारा उच्चारित मंत्रों के साथ विश्व शांति एवं कल्याण की भावना के साथ कुंडों में आहुति दे रहे थे। महायज्ञ के बाद चातुर्मासरत मुनि श्री विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विवोधसागरजी महाराज के पावन सानिध्य में शोभायात्रा निकाली गई। सर्वप्रथम श्री जिनेंद्र प्रभु की प्रतिमा को रथ पर विराजमान किया गया।

बैंडबाजों व घोड़ा बग्घी के साथ बड़े जैन मंदिर से रथ यात्रा प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से भ्रमण करती हुई बड़े जैन मंदिर पहुंची। भव्य शोभा यात्रा में मुनिराज श्री जिनेंद्र प्रभु के रथ के आगे आगे चल रहे थे। तीन लोक के नाथ के रथ को युवा साथी अपने हाथों से खींच रहे थे। शोभायात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रीजी की आरती की गई एवं युगल मुनिराजों का पाद प्रक्षालन कर भव्य अगवानी की गई। घोड़ा बग्गियों में सिद्धचक्र विधान के विशेष इंद्र इंद्राणी विराजमान थे।

 हर्ष ध्वनि के साथ हुआ श्रीजी का जलाभिषेक        

ब्रह्मचारी अजय भैयाजी (झापन तमूरा वाले) दमोह के निर्देशन में बड़े जैन मंदिर में स्वर्ण कलशों द्वारा श्री जी का जलाभिषेक किया गया। कलशों से निकली जलधारा जैसे ही जिनेंद्र प्रभु के सिर पर आई, वैसे ही पूरा पंडाल हर्षध्वनि के साथ भगवान की जय जयकार करने लगा। सभी उपस्थित साधर्मी बंधुओं माताओं बहिनों ने श्री जिनेंद्र प्रभु की आरती कर पुण्यार्जन किया। महायज्ञ से पूर्व प्रातःकालीन वेला में श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। महायज्ञ एवं रथयात्रा के साथ ही 8 दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हुआ।

विधान समापन पर सभी विधानकर्ताओं ने श्री जिनेंद्र प्रभु एवं युगल मुनिराजों के श्री चरणों में विधान के दौरान जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना की। समारोह के समापन पर सकल जैन समाज की ओर से प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (मुरैना वाले), संघस्थ ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (बम्होरी), निर्देशक अजय भैयाजी (झापन तमूरा) दमोह, पुजारी, भजन गायक व संगीतकार हर्ष जैन भोपाल का बहुमान किया गया।

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