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श्री शांतिनाथ जीकुंथुनाथ जी अरहनाथ जी का हुआ स्वर्ण कलशों से मस्तकाभिषेक    ऊर्जावान और पवित्र तीर्थ है पावागिरी    


पावागिरी ऊना में पहाड़ी पर श्री शांतिनाथ जीकुंथुनाथ जी अरहनाथ जी का मस्तकाभिषेक स्वर्ण कलशों से हुआ। पढि़ए दीपक प्रधान की रिपोर्ट… 


ऊना। पावागिरि ऊन ऊर्जावान और पवित्र तीर्थ है। यहां का कण-कण पावन है तभी यहां पर हर वर्ष वार्षिक मेले में मुनि संघ पिच्छि धारी संतों का सानिध्य प्राप्त होता। इस अवसर पर क्षुल्लक श्री ने बताया कि शांति नाथ भगवान के बाद आज तक जैन धर्म की पताका अक्षुण्ण रूप से फहरा रही है, ये भूमि मोक्ष स्थली है और जैन धर्म में जन्म भूमि से ज्यादा मोक्ष भूमि का महत्वपूर्ण माना गया है। यहां पर चार सगे भाइयों ने मोक्ष को प्राप्त कर सिद्ध पद को प्राप्त किया है। हमारे जीवन में किसी सिद्ध क्षेत्र की वंदना पवित्र भावना से करना चाहिए और अपने स्वभाव को गुण ग्राहक बनाना चाहिए।

जैन शासन में चमत्कार चाहते हो तो अपनी भक्ति में इतनी शक्ति लगा दो कि चमत्कार हो जाए। जैन धर्म में चमत्कार को नमस्कार नहीं, बल्कि नमस्कार से चमत्कार हो जाता है। भगवान आपका प्रेजेंटेशन नही अटेंशन देखते है जैसे भगवान महावीर के समवशरण में फूल लेकर शामिल होने जा रहा था किंतु असमय उसकी मृत्यु हो गई लेकिन उसकी श्रद्धा की वजह से उसने तत्काल देव गति को प्राप्त किया। उपरोक्त प्रवचन सिंह रथ प्रवर्तक आचार्य विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज के शिष्य परम श्रद्धेय, मंत्र महर्षि, ज्योतिषविद, धर्मयोगी गुरुदेव डा क्षुल्लक योग भूषण जी महाराज ने प्रस्तुत किए।

गाजे-बाजे से निकाली गई श्री जी की शोभायात्रा 

पावागिरी ऊना के शांतिनाथ, कुंथुनाथ, अरहनाथ की प्राचीन प्रतिमाओं पर प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य अविनाश जैन सनावद , संदीप प्रकाश पहाडिय़ा इंदौर, प्रदीप जैन मंदसौर ने प्राप्त किया। सभा में दीप प्रज्ज्वलित करने का सौभाग्य सुधा महेंद्र जैन बैंक वाले सनावद को मिला जबकि क्षुल्लक जी के पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य आलोक अजय जी खंडवा को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विवेक विनोद जैन खरगोन को प्राप्त हुआ। श्री जी की शोभायात्रा तलहटी मंदिर से शांतिनाथ पहाड़ी मंदिर तक बैंड बाजे एवं भजन नृत्य करते हुए निकाली गई पश्चात अभिषेक हुआ। अनेक श्रद्धालुओं ने दान देकर सभी मंदिरों में शिखर पर ध्वजारोहण किया। कार्यक्रम का संचालन ट्रस्ट्री मनीष दोषी ने किया। स्फटिक मणि के मंदिर निर्माण की घोषणा अशोक झांझरी एवं गुलाबराव मंडलोई महेश्वर ने की। अध्यक्ष हेमचंद झांझरी, महामंत्री अशोक झांझरी, विनोद जैन, अरुण धनोते, अतुल कासलीवाल, सुनील जैन, चिंतामण जैन, सुधीर चौधरी, कासलीवाल अर्पित, ऋषभ बडज़ात्या आदि का योगदान सराहनीय रहा। आज बड़वानी अंजड़ मनावर बाकानेर धरमपुरी खंडवा सनावद बड़वाह मंडलेश्वर महेश्वर खरगोन इंदौर, भोपाल, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ आदि से भक्त गन शामिल हुए थे।

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