प.पू. आचार्य 108 उदार सागर जी महाराज के सानिध्य में एवं
प्रतिष्ठाचार्य/निर्देशक ब. श्री जय निशांत जी, टीकमगढ़ , पं.सनत कुमार, पं.विनोद कुमार, रजवांस , पं.अशोक सिंघई, बम्हौरी, पं. राजकुमार शास्त्री, रजपुरा
सम्मानीय महानुभाव !
अत्याधिक हर्ष के साथ सूचित किया जाता है कि परम पूज्य आचार्य प्रवर उदारसागर जी महाराज के सानिध्य में 22 अप्रैल 2021 गुरूवार से 28 अप्रैल 2021 बुधवार तक श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र नैनागिरि में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया गया है। नैनागिरि तीर्थ पर नवनिर्मित सिद्ध मंदिर में सर्वोत्कृष्ट धवलतम वियतनामी मार्बल से निर्मित सिद्धों की पाँच पदमासन प्रतिमायें स्थापित की गई हैं। प्रत्येक प्रतिमा इसी मार्बल की 500 किलो से अधिक वजन की एकाकी शिला के स्वतंत्र विशालतम कमलासन पर विराजित की गई है। इसी मंदिर में आठवीं/नवीं शताब्दी में देशी पत्थर से निर्मित बुन्देलखण्ड में प्राचीनतम तीन प्रतिमायें (एक पदमासन तथा दो खड़गासन) ग्रेनाईट पाषाण से निर्मित तीन स्वतंत्र वेदियों पर विराजमान की गई है। पर्वत पर स्थित भगवान पार्श्वनाथ के प्राचीनतम मंदिर (सन 1050 में निर्मित) में नवीनीकृत वेदी पर आठवीं/नवीं शताब्दि में देशी पाषाण से निर्मित भगवान पार्श्वनाथ की दो प्रतिमायें विराजमान की गई है।
इन नवीनतम और प्राचीनतम प्रतिमाओं का प्रतिष्ठा समारोह 22 अप्रैल, 2021 से 28 अप्रैल, 2021 तक आयोजित किया गया है। साथ ही नवनिर्मित 5 वेदियों की प्रतिष्ठा संपन्न की जायेगी। नवनिर्मित कैलाश पर्वत के 72 चैत्यालयों में 72 प्रतिमायें और अंतिम मंदिर की नवनिर्मित वेदी पर 24 प्रतिमायें विराजमान की जावेंगी। इन कार्यक्रमों के लिए पंचकल्याणक की 1200 वर्ग फीट की वेदी एवं दो कक्षों का शिलान्यास प्रात: 11 बजे 17 फरवरी 2021, बुधवार को संपन्न हो रहा है।
आप सभी से विनम्र निवेदन है कि वेदी शिलान्यास के मंगलमय कार्यक्रम में पधारें एवं सिद्धभूमि नैनागिरि की वंदना कर पुण्यलाभ अर्जित करें।
विनीत न्यासी मंडल तथा प्रबंध समिति के पदाधिकारी एवं सदस्यगण संपर्क सूत्र- 9407533103, 9302968962, 6264656108













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