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मनाया गया मोक्ष कल्याणक महोत्सव भी : श्रावकगणों ने नवधा भक्ति पूर्वक दिया मुनिराज नेमिनाथ प्रभु को आहार


कस्बे में चल रहे श्री 1008 नेमिनाथ दिगम्बर जिनबिंम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चतुर्थ दिवस गुरुवार को सकल जिनवाणी तत्वरसिक जैन समाज ने भक्ति भाव पूर्वक प्रभु का ज्ञानकल्याणक महोत्सव मनाया। शुक्रवार सुबह मोक्ष कल्याणक के तहत अनेक धार्मिक क्रियाएं हुईं। पढ़िए राजीव सिंघाई की विशेष रिपोर्ट…


महरौनी (ललितपुर)। कस्बे में चल रहे श्री 1008 नेमिनाथ दिगम्बर जिनबिंम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चतुर्थ दिवस गुरुवार को सकल जिनवाणी तत्वरसिक जैन समाज ने भक्ति भाव पूर्वक प्रभु का ज्ञानकल्याणक महोत्सव मनाया। प्रातःकाल की मंगल बेला पर जयघोष से द्वारावती नगरी गुंजायमान हो उठी, जहां बरदत्त राजा-रानियों सहित श्रावक-श्राविकाओं ने महामुनिराज नेमिनाथ को नवधा भक्ति भाव पूर्वक पड़गाहन कर आहार दिया और अपना जीवन धन्य किया। मुनिराज निर्विघ्न आहार करके वन गमन कर गए, जिनके साथ हजारों श्रावकगणों ने दिगम्बर महामुनिराज की भक्ति कर उनकी जयघोष करते हुए उनका गुणगान किया।

समवशरण में खिरी दिव्यध्वनि

संध्या की बेला पर मुनिराज नेमिप्रभु को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और सौधर्म इंद्र की आज्ञा से कुबेर ने समवशरण की रचना की, जहां तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान का प्रथम धर्मोपदेश अर्थात दिव्य ध्वनि का प्रसारण हुआ, जिसका सभी भव्य जीवों ने लाभ लेकर अपनी अपनी शंकाओं का समाधान पाया। सभी इंद्र – इंद्राणियों ने समवशरण सहित तीर्थंकर नेमिनाथ का पूजन कर उनके गुणगान किया। सभा का संचालन पण्डितश्री संजयकुमार शास्त्री जेबर कोटा ने प्रतिष्ठाचार्य पं. अभिनन्दनजी शास्त्री के निर्देशन में किया। मंच निर्देशन डॉ. विवेक शास्त्री इंदौर ने किया।

मंगल प्रवचनों का मिला लाभ

प्रातःकाल की मंगल बेला में भक्तों ने मेरठ से आए डॉ. मनीष शास्त्री के श्रीमुख से दिगम्बर महामुनिराजों की महिमा सुनी, साथ ही आहारदान का सच्चा स्वरूप तथा उसकी वास्तविक विधि जानी। दोपहर की सभा में पण्डितश्री राजेंद्रकुमार जैन जबलपुर ने समवशरण और उसमें विराजमान अरिहंत का परमात्मा स्वरूप बताया और सभी से उनके बताए मार्ग पर चलकर जिनवाणी का स्वाध्याय करने की प्रेरणा दी।

मोक्षकल्याणक महोत्सव

महोत्सव के मीडिया प्रभारी सूर्यकान्त त्रिपाठी, शैलेन्द्र नायक एवं संयोजक डॉ. विकास शास्त्री, राजीव चौधरी ने बताया कि पांचवें दिन शुक्रवार को मोक्षकल्याणक महोत्सव का शुभारंभ प्रातः 6 बजे शांति जाप से हुआ। पश्चात 7 बजे से श्री जिनेन्द्र पूजन, 7.30 से दशविधि पाठ, निर्वाण दृश्य एवं निर्वाण कल्याणक की पूजा हुई। इसके बाद 9.30 से शास्त्र स्वाध्याय एवं 10.15 से श्री जिनेन्द्र शौभायात्रा शौरीपुर नगरी से नवीन जिन मंदिर पहुंची, जहां जिनालय सहित स्वाध्याय भवन का उद्घाटन कर जिनबिंम्बों सहित आचार्य भगवंतों के चरण एवं जिनवाणी की स्थापना कर कलशारोहण किया गया।

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