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श्रध्दा ही सम्यक दर्शन है, ज्ञान प्राप्ति के बाद संसार के दुखों से छुटकारा संभव

जयपुर । देव शास्त्र गुरु में श्रध्दा ही सम्यक दर्शन है, इसकी प्राप्ति के लिए देवाधिदेव की आराधना करनी चाहिए यह बात डॉ श्रेयांस जैन ने कही। वे भट्टारक जी की नसियां में अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद् के तत्वावधान में आयोजित शिक्षण प्रशिक्षण शिविर के दौरान आध्यात्म और सिध्दांत विषय पर बात कर रहे थे। छह दिवसीय शिविर के दौरान विद्वानों ने जैन धर्म व दर्शन के अनुसार संस्कारों का महत्व बताया।
वहीं डॉ शीतल जैन मंत्रोच्चार और उसके नियम बताएं। राजकुमार कोठ्यारी ने मंदिर वास्तु प्रकरण की विस्तार से जानकारी दी। इस धर्मसभा के दौरान आर्यिका स्वस्तिभूषण ने कहा कि ज्ञान प्राप्ति के बाद संसार के दुखों से छुटकारा संभव है।
इस दौरान सकल जैन समाज, गोनेर की ओर से आर्यिका को श्रीफल भेंट कर गोनेर में मंगल प्रवेश का आग्रह किया।
कार्यक्रम के दौरान पर राजेन्द्र सेठी, महावीर पाटनी, संजय सेठी, महावीर सेठी, अरुण जैन, नरेश बाकलीवाल, चेतन निमोड़िया, जय कुमार जैन, मुख्य समन्वयक कमल बाबू जैन, रमेश तिजारिया, शिखर चन्द कासलीवाल, प्रदीप जैन, रमेश ठोलिया, राजीव लाखना सहुत समाजजन मौजूद रहे।

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