अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलुरू में मास्टर्स इन डेवलपमेंट के अंतिम सेमेस्टर में सनावद की कुमारी श्रद्धा जैन ने निमाड़ की तीखी मिर्च की उत्पादन व निर्यात श्रृंखला में महिलाओं के योगदान पर अपना रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया। उन्होंने बेड़िया निमाड़ की विशेषता, मण्डी की समस्या, महिला श्रमिकों की स्थिति उनका स्वास्थ्य व अधिकार, प्रवासी मजदूरों की समस्याएं, घरेलू हिंसा आदि पर स्कूल ऑफ डेवलपमेंट के प्रोफेसर्स जो महिला व आजीविका पैनल में रहे, उनके समक्ष प्रस्तुत की। पढ़िए विशेष रिपोर्ट…
सनावद। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलुरू में मास्टर्स इन डेवलपमेंट के अंतिम सेमेस्टर में सनावद की कुमारी श्रद्धा जैन ने निमाड़ की तीखी मिर्च की उत्पादन व निर्यात श्रृंखला में महिलाओं के योगदान पर अपना रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया। उन्होंने बेड़िया निमाड़ की विशेषता, मण्डी की समस्या, महिला श्रमिकों की स्थिति उनका स्वास्थ्य व अधिकार, प्रवासी मजदूरों की समस्याएं, घरेलू हिंसा आदि पर स्कूल ऑफ डेवलपमेंट के प्रोफेसर्स जो महिला व आजीविका पैनल में रहे, उनके समक्ष प्रस्तुत की, यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राएं भी प्रेजेंटेशन में शामिल हुए। शिक्षक दम्पती अनुपमा-राजेन्द्र महावीर की सुपुत्री श्रद्धा जैन ने नवम्बर- दिसम्बर माह में बेड़िया, जिरावट चितावद ,ढकलगांव, दसोड़ा आदि ग्रामों में जाकर लगभग डेढ़ माह में पेपर तैयार किया था। रिसर्च पर बंगलुरू में फील्ड प्रोजेक्ट फेयर विगत दिनों में अपनी प्रस्तुति देकर सराहना प्राप्त की।

स्वास्थ्य व सुरक्षा के अधिकारों की जागरूकता आवश्यक है- श्रद्धा जैन
श्रद्धा जैन का कहना है कि अनेक महिलाओं से साक्षाकार किये, उनके घर में भी रुकीं, उनके साथ भोजन किया। उन्होंने पाया कि महिलाएं प्रातः 5 बजे उठती हैं। सबका भोजन बनाकर प्रातः 8 बजे तक मण्डी पहुंच जाती हैं। वे बिना मास्क के बिना ग्लव्स के मिर्ची का काम करती हैं, उनके हाथ जलन करते हैं लेकिन उनकी मजबूरी है कि उनके पास हाथों की सुरक्षा व धांस अन्दर न जाए, इस हेतु मास्क नहीं है। टायलेट नहीं है, जिससे उनको खुले में जाना होता है, जिससे उनको इन्फेक्शन होता है, कई महिलाएं दूरी होने व शर्म के कारण यूरिन रोक कर काम करती है, जिससे स्वास्थ्यगत परेशानियां होती हैं। घरों में पुरुष शराब पीकर मारपीट करते हैं। उनके काम से प्राप्त रुपए छीन लेते हैं, घरेलू हिंसा का शिकार होने पर भी उनकी मदद नहीं हो पाती, क्योंकि अपनी रोजी रोटी कमाने के अलावा महिलाओं का उद्देश्य और कुछ नहीं बचता। चौबीस घण्टे में से अठारह घण्टे काम करने के बावजूद महिलाएं शोषित हो रही हैं। मंडी के बाहर जिन गांवों में महिलाएं ये तीखी मिर्च तैयार करती हैं, अपने घरों में रहकर खेती संभालती हैं या इन खेतों में मजदूरी करती हैं। खेत से मिर्ची घर आती है तो घरेलू काम से समय बचते ही मिर्ची की सफाई करने लगती हैं। उन महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रभावों की जागरूकता पर काम किया जा सकता है।
एक जिला- एक उत्पाद में है मिर्ची
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में एक-जिला- एक उत्पाद शामिल है, जिसमें लाल मिर्च को जीआई टैग के लिए नामांकित किया गया है, बड़ी मात्रा में मिर्ची का निर्यात भी होता है। बेड़िया मिर्च मण्डी में कार्यरत महिला श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा नियमों का पालन होने से न केवल मिर्च उत्पादन के प्रति जागरूकता बढ़ेगी बल्कि लाल मिर्च राज्य व जिले की आर्थिक व्यवस्था में भी अपना योगदान देगी। श्रद्धा जैन ने बेड़िया मिर्च मंडी से रोशनी, माही, प्रांजल, खुड़वा, पीली मिर्ची के सेम्पल भी ले गई, जिन्हें देखकर उपस्थित जनों ने मिर्ची की वैरायटी को समझा। उल्लेखनीय है कि श्रद्धा जैन के रिसर्च पर जिला प्रशासन व बेड़िया मण्डी ध्यान दे तो निमाड़ी मिर्ची उत्पादन व इस मिर्च को निर्यात के लिए तैयार करने वाली हर महिला की जीवन स्थिति में सुधार हो सकता है।













Add Comment