श्री शोरीपुर नगरी, खैरवाड़ा में 18 से 28 सितंबर 2025 तक 11 दिवसीय 25 समोशरण वाला कलपद्रुम विधान चल रहा था। विधान में 800 से 1000 साधर्मी बन्धुओं ने भाग लिया। दिग्विजय यात्रा, भगवान महावीर पर नाटक, श्रावक प्रवचन और विश्व महायज्ञ हवन जैसे कार्यक्रमों से यह आयोजन ऐतिहासिक बन गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
श्री शोरीपुर नगरी, खैरवाड़ा में 18 सितंबर से 28 सितंबर 2025 तक 11 दिवसीय 25 समोशरण वाला भव्य कलपद्रुम विधान चल रहा है। इस विधान में मुख्य पात्र चक्रवर्ती जुगल विरेन्द्रजी वखारिया, सोधर्म कुलदीपजी बाबुलालजी शाह, कुबेर रमणजी चम्पालालजी वखारिया और यज्ञ नायक शान्तिलालजी पुनमचन्दजी पंचोली है।
इसके अतिरिक्त 4 महामंडलेश्वर इन्द्र, 20 मंडलेश्वर इन्द्र और 80 अन्य इन्द्रों ने कुल कलपद्रुम विधान में भाग लिया। इसके अलावा 800 से 1000 साधर्मी बन्धु बिना इन्द्र बने भी विधान का लाभ ले रहे थे। यह खैरवाड़ा क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा कलपद्रुम विधान माना गया। मुख्य पात्र बड़े समोशरण में बैठकर पूजा-अर्चना कर रहे थे, जबकि अन्य 24 महामंडलेश्वर और मंडलेश्वर छोटे समोशरण में सम्मिलित हुए।
विधान के दौरान खडक महासभा के अध्यक्ष संजयजी दोशी और महामंत्री सुधीर जी पंचोली ने खैरवाड़ा के सरक्षक बाबुलालजी सर्राफ, अध्यक्ष विरेन्द्रजी वखारिया और चातुर्मास समिति के अध्यक्ष नरेन्द्रजी पंचोली एवं मंत्री कुलदीपजी शाह का स्वागत किया। समाज के अध्यक्ष व मंत्रीगण ने उनका आभार व्यक्त किया।
कलपद्रुम विधान के 9वें दिन चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा बग्गी में निकाली गई। मार्ग में रिश्तेदारों और श्रद्धालुओं ने तिलक, श्रीफल और राशि देकर भव्य स्वागत किया। यात्रा के पश्चात शोरीपुर नगरी लौटकर पंडाल में भगवान की आरती संपन्न हुई। दिल्ली से आए पंडित अरविन्दजी शास्री ने श्रावकों को प्रवचन सुनाया। इसके बाद भगवान महावीर पर नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसमें महाराज अमितजी शाह ने भाग लिया। महाराज ने श्रावकों को णमोकार मंत्र पर विश्वास और प्रतिदिन जाप करने की प्रेरणा दी।
125 प्रतिमाओं की भव्य शोभा यात्रा निकाली
विधान के 9वें और 10वें दिन 508 अर्घ चढ़ाए गए। 11वें दिन सुबह पूजा-अर्चना के बाद विश्व महायज्ञ हवन हुआ, जिसके पश्चात विधान की पूर्णाहुति हुई। अंतिम दिन शोरीपुर नगरी से नेमिनाथ मंदिर तक 125 प्रतिमाओं की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा में बग्गियों में चक्रवर्ती, सोधर्म इन्द्र, कुबेर महायज्ञ नायक और 4 महामंडलेश्वर इन्द्र शामिल थे।यह कलपद्रुम विधान खैरवाड़ा जैन समाज के लिए ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय आयोजन साबित हुआ, जो आने वाले समय में भी याद किया जाएगा।













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