बीसवीं सदी में दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती 108 आचार्यश्री शांतिसागरजी महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठान का 100वां वर्ष 2024 में प्रारंभ होगा। वर्ष 2024-2025 में भव्य आयोजन होंगे। आचार्य वर्धमानसागर के सान्निध्य में देशभर के श्रावक श्रेष्ठीयों की राष्ट्रीय सभा हुई। पढ़िए राजेन्द्र जैन महावीर की रिपोर्ट…
उदयपुर। बीसवीं सदी में दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती 108 आचार्यश्री शांतिसागरजी महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठान का 100वां वर्ष 2024 में प्रारंभ होगा। आचार्य पद प्रतिष्ठापन के 100वें वर्ष को आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव के रूप में सन् 2024-25 में भव्य विशाल स्तर पर वैचारिक आयामों के साथ संस्कृति संवर्धन, सामाजिक सरोकार के बहुउद्देशीय पंचसूत्री कार्यक्रमों के साथ मनाया जाएगा। महोत्सव के आयोजन के लिए विस्तृत रूपरेखा व कमेटी गठन के लिए परम्परा के पंचम पट्टाधीश राष्ट्रगौरव, वात्सल्यवारिधि आचार्य 108 श्री वर्धमानसागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में देश के समस्त श्रावक श्रेष्ठियों की राष्ट्रीय सभा उदयपुर के नागेन्द्र भवन में शनिवार को हुई थी।

संस्कार ही संस्कृति को जीवित रखते है – आचार्य श्री वर्धमानसागर
विशाल राष्ट्रीय सभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री वर्धमानसागर महाराज ने कहा कि आचार्य शांतिसागरजी महाराज ने सन 1934 का चातुर्मास उदयपुर में किया था। उन्हीं के संस्कार उनकी संस्कृति रक्षण की भावना के संस्कार संपूर्ण देश में व्याप्त होकर जनत्व व भ्रमण दिगम्वरत्व को जीवित रखे हुए हैं। संस्कृति को जीवित रखने में संस्कारों का बड़ा महत्व है। आज हम सब आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के संस्कार व उपकारों से प्रभावित है। उनका गुणगान करने उनके कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव संस्कृति संरक्षण व सामाजिक सरोकार का माध्यम बनेगा।

बीसवीं सदी का सूर्य जिसने मिथ्यात्व मिटाया
मुनिश्री हितेन्द्रसागर महाराज ने आचार्यश्री के जीवन परिचय से अवगत कराते हुए कहा कि वे दक्षिण भारत से निकले ऐसे सूर्य थे जिन्होंने मिध्यात्व की अवधारणा से मुक्ति दिलाने का कार्य किया । गर्व से कहेंगे कि हम जैन है वह सूत्र हमें आचार्य शांतिसागरजी ने दिया। देशभर से आए श्रेष्ठी व उदयपुर के समाजजनों की राष्ट्रीय सभा में मंगलाचरण सीमा गोवा ने किया। चित्र अनावरण व आचार्यश्री वर्धमानसागर का पाद प्रचालन अशोक पाटनी आर. के. मार्बल, अनिल सेठी, राजेन्द्र कटारिया, संजय पापड़ीवाल आदि ने किया। स्वागत भाषण शांतिलाल बेलायत उदयपुर ने दिया।

पंचसूत्रों से बदलेंगे सामाजिक परिदृश्य – प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन
आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव की प्रस्तावना रखते हुए प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन धरियावद ने कहा कि दुनिया को सल्लेखना का जीवन पाठ पढ़ाने वाले आचार्य शांतिसागर का उपकार हम भूल नहीं सकते। शताब्दी वर्ष में पंच सूत्री कार्यक्रम में आचार्य शांतिसागर महाराज का जीवन चरित्र जन-जन तक पहुंचाना, उनकी कीर्ति स्थापना के लिए कीर्ति फलक स्तूप निर्माण, सेवा संकूल के रूप में पाठशालाओं का निर्माण व उन्नयन, व्यायामशालाओं का निर्माण, राष्ट्रीय जनगणना में जैन लिखवाने की अनिवार्यता हेतु जागरुकता कार्यक्रम स्वावलंबन योजना के माध्यम से आर्थिक विपन्न समाजजनों का स्वरोजगार आदि प्रकल्पों के लिए सहायता देना। उच्च शिक्षा में आर्थिक बाधाओं को दूर करना आदि अनेकों आयोजन होंगे। यह वर्ष 2024 से 2025 के बीच वृहत स्तर पर मनाया जाएगा। आचार्य शांतिसागर के जीवन पर आधारित पंचसूत्रीय आयोजन की संक्षिप्त जानकारी से युक्त आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव 2024-25 के आकर्षक फोल्डर का विमोचन अतिथियों ने किया।













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