मुरैना में श्री वर्धमान चैत्यालय परिसर में आयोजित 16 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का शुभारंभ मुनिश्री विलोकसागर जी व मुनिश्री विबोधसागर जी के सान्निध्य में हुआ। यह विधान 25 जुलाई से 9 अगस्त तक चलेगा और 10 अगस्त को विश्व शांति महायज्ञ के साथ संपन्न होगा। जैन संस्कृत विद्यालय के छात्रगण प्रतिदिन पूजा में सहभागी हो रहे हैं।पढ़िए मनोज जैन नायक की विस्तृत रिपोर्ट…
मुरैना। मुरैना स्थित श्री वर्धमान चैत्यालय परिसर में शुक्रवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में प्रारंभ हुआ सोलह दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान, मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के पावन सान्निध्य में धार्मिक श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आरंभ हुआ। यह विशेष अनुष्ठान 25 जुलाई से 9 अगस्त तक निरंतर जारी रहेगा, जिसके समापन पर 10 अगस्त को विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा
*यह विधान आत्मिक शुद्धि, आर्थिक उन्नति*
जैन संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रतिष्ठाचार्य पं. चक्रेश शास्त्री ने बताया कि शुक्ल पक्ष में 16 दिनों तक श्री शांतिनाथ विधान करना अत्यंत फलदायी होता है। यह विधान आत्मिक शुद्धि, आर्थिक उन्नति और जीवन की समस्त बाधाओं से मुक्ति का मार्ग प्रदान करता है। विधान के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग पुण्यार्जक परिवारों द्वारा भगवान शांतिनाथ की पूजा, अर्घ्य समर्पण, मंत्रोच्चार और विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे।
*संस्कृत श्लोकों और मंत्रोच्चार के साथ भक्ति प्रस्तुतियां*
विधान का प्रथम दिन अत्यंत उत्साहपूर्वक मनाया गया, जिसमें जैन छात्रावास के विद्यार्थियों ने केसरिया वस्त्रधारण कर शांतिनाथ भगवान की अष्टद्रव्य से पूजा की। संस्कृत श्लोकों और मंत्रोच्चार के साथ जब नन्हें-मुन्ने बच्चों की भक्ति प्रस्तुतियाँ हुईं, तो पूरा परिसर पुण्य और भक्ति से गूंज उठा। भक्तों ने ताली बजाकर अनुमोदना की। इस आयोजन के प्रेरणास्त्रोत पूज्य मुनिराजों के निर्देशन में भक्ति भाव से ओतप्रोत वातावरण बना हुआ है। आयोजन का संपूर्ण लाभ जैन समाज के समस्त श्रद्धालुओं को प्राप्त हो रहा है।













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