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विश्व कल्याण की कामना से किया शांतिनाथ महामंडल विधान : शांतिधारा, अभिषेक और अर्घ्य समर्पण कर पुण्य संचय


सिहोनिया जैन अतिशय क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और संगीत से गूंजा वातावरण, श्रद्धालुओं ने शांतिधारा, अभिषेक और अर्घ्य समर्पण कर पुण्य संचय किया। विश्व कल्याण की कामना से शांतिनाथ महामंडल विधान में सहभागिता की। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर…


 अंबाह। जैन धर्म के अनुयायियों के लिए पुण्य और भक्ति से भरपूर वातावरण उस समय साकार हुआ। जब अंबाह तहसील के प्रतिष्ठित जैन अतिशय क्षेत्र सिहोनिया में श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का आयोजन पूरे श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। यह धार्मिक अनुष्ठान महावीर प्रसाद जैन वरेह एवं जय कुमार जैन (तेल मिल) परिवार द्वारा पृथक-पृथक रूप से आयोजित करवाया गया था। जिसका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे जगत के कल्याण की भावना से प्रेरित था। धार्मिक विधान की शुरुआत जिनालय में भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा के अभिषेक और शांतिधारा से की गई। भक्तों ने इस दौरान जिनेन्द्र देव का ध्यान करते हुए मंगलकामनाएं कीं। शांतिधारा के दौरान वातावरण मंत्रोच्चारों से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। इसके पश्चात इन्द्र-इन्द्राणियों द्वारा देव, शास्त्र और गुरु की विशेष पूजा की गई। अष्ट द्रव्यों के साथ भगवान शांतिनाथ की विधिपूर्वक अर्चना की गई। जिसमें मधुर स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पूजन विधान के अंतर्गत श्रद्धालुओं ने जगत कल्याण की भावना से प्रभु के चरणों में अर्घ्य समर्पित किए। इस दौरान श्री शांतिनाथ भगवान की जय के उद्घोष से संपूर्ण क्षेत्र धर्ममय हो गया। श्रद्धालुओं की आस्था और ऊर्जा ने इस आयोजन को एक अलौकिक रूप दे दिया।

भजनों की प्रस्तुति ने भाव विभोर किया

पूरे विधान के दौरान संगीत मंडली द्वारा प्रस्तुत किए गए भजन श्रद्धालुओं को भीतर तक छू गए। एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। भक्ति की इस अविरल धारा में सभी श्रद्धालु अपनी उपस्थिति को सार्थक अनुभव कर रहे थे। शांतिनाथ महामंडल विधान का समापन महाअर्घ्य समर्पण, शांतिपाठ और विसर्जन विधि के साथ किया गया। पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से जिनेन्द्र देव की मंगल आरती उतारी और भगवान शांतिनाथ का ध्यान कर पुण्य संचय किया। इस अवसर पर शास्त्र वाचन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। उन्होंने जिनवाणी का श्रवण कर धर्म लाभ अर्जित किया।

भक्तामर स्तोत्र पाठ और 48 दीपकों के साथ मंत्रोच्चार

धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला में श्रद्धालुओं ने णमोकार महामंत्र का जाप कर 48 दीपकों के साथ भक्तामर स्तोत्र का पाठ किया। प्रत्येक श्लोक के साथ मंत्रोच्चार करते हुए दीप समर्पित किए गए। जिससे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। आचार्य मानतुंग द्वारा रचित भक्तामर स्तोत्र की महिमा का भी भक्तों ने वर्णन किया और भगवान आदिनाथ की मंगल आरती के साथ पूजा अर्चना की गई।पूरे धार्मिक कार्यक्रम का संचालन पंडित मुकेश जैन शास्त्री द्वारा किया गया। उन्होंने जैन आगम के अनुसार शांतिनाथ महामंडल विधान का विस्तृत अर्थ एवं महत्व श्रद्धालुओं को समझाया। पंडित ने बताया कि यह विधान न केवल आत्मशुद्धि का माध्यम है, बल्कि विश्वशांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत प्रभावशाली है। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि किस प्रकार प्रत्येक मंत्र और प्रत्येक पूजन प्रक्रिया के पीछे गहन दर्शन और कल्याण की भावना छिपी है। इस भव्य धार्मिक आयोजन में सिहोनिया व आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से पूजन, आरती और भजन-कीर्तन में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया।

भक्ति, भावना और अनुशासन का अद्भुत संगम

यह आयोजन भक्ति, भावना और अनुशासन का अद्भुत संगम बन गया। श्रद्धालुओं की सहभागिता, आयोजकों की व्यवस्था और पंडित मुकेश जैन शास्त्री के मार्गदर्शन ने इसे एक स्मरणीय आध्यात्मिक पर्व बना दिया। कमेटी के जिनेश जैन ने कहा कि सिहोनिया जैन अतिशय क्षेत्र में आयोजित यह विधान सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, समाज की एकता और जगत के कल्याण की एक अनुपम अभिव्यक्ति थी।

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