रामगंजमंडी में पहली बार एक साथ 46 मंडलों पर शांतिनाथ महामंडल विधान कर भगवान शांतिनाथ का जन्म तप एवं मोक्ष कल्याणक मनाया गया। मूकमाटी अर्थ ज्ञान शिविर एवं सम्यक ज्ञान शिक्षण शिविर का समापन हुआ।
रामगंजमंडी। सोमवार की बेला में 1008 श्री शांति नाथ भगवान का जन्म तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव भक्ति भाव के साथ मनाया गया। सर्वप्रथम मूल नायक शांतिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांति धारा भक्ति उल्लास के साथ की गई इसी के साथ सर्वप्रथम मूलनायक शांतिनाथ भगवान के समक्ष निर्वाण कांड बोलते हुए निर्वाण लाडू समर्पित किया गया। इसके उपरांत मंदिर जी के मुख्य पंडाल में दो पांडुक शिलाओं पर श्रीजी को विराजमान किया गया एवम शांतिधारा की गई अभिषेक किया गया। रामगंज मंडी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि एक साथ 46 मंडलों पर एक साथ शांतिनाथ विधान किया गया संपूर्ण वातावरण भक्ति से ओतप्रोत था पूरा पंडाल उमंग उल्लास से परिपूर्ण था इस अनुष्ठान को प्रशांत जैन आचार्य एवं आकाश जैन आचार्य के संयोजन में श्री विनोद जैन आचार्य, हेमंत जैन आचार्य मनोज जैन आचार्य जगदीश जैन आचार्य ने संपन्न करवाया। मुख्य मंडल पर सौधर्म इंद्र बनकर सभी मांगलिक क्रिया करने का सौभाग्य श्री विनोद कुमार सुनील कुमार सुरलाया को प्राप्त हुआ मुख्य मंडल पर चार कलश स्थापित करने का सौभाग्य सुरेंद्र शुभम जैन रेलवे वाले रमेश कुमार जितेंद्र विनायका, दिलीप, भूपेंद्र, राकेश कुमार बाकलीवाल, निर्मल जैन नीलेश धर्मेश जैन को प्राप्त हुआ।
समस्त विद्वानों का सम्मान किया
रविवार की संध्या बेला में 17 मई से चल रहे शिविर का समापन हो गया कार्यक्रम के शुभारंभ में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष समाज के प्रमुख जन द्वारा एवम मुख्य कलश स्थापन कर्ता आदि द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया। इसके उपरांत शामगढ़ से आई खुशबू जैन, मीठी जैन द्वारा शास्त्रीय भक्ति संगीत के द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। इस क्रम में समस्त विद्वानों का सम्मान किया गया एवं शिविर में अपनी सेवाएं देने वाले सभी सहयोगियों का भी स्वागत सम्मान किया गया। रामगंजमंडी की बेटी कथांशी जैन द्वारा अपनी कला के द्वारा बनाए गए चित्र विद्वान श्री विनोद जैन आचार्य, हेमंत जैन आचार्य एवं मनोज जैन आचार्य को भेंट की बिटिया के द्वारा बनाए गए चित्र को सभी के द्वारा सराहा गया। एवं समाज की दो बेटियां सुश्री श्रेया जैन एवम सुश्री धरा जैन का सम्मान किया गया श्रेया ने विज्ञान संकाय में 98 प्रतिशत अंक प्राप्त किए एवं धरा जैन ने वाणिज्य संकाय में 89 प्रतिशत अंक प्राप्त कर समाज का नाम रोशन किया। इन दोनों बिटियाओं की समाज के संरक्षक अजीत सेठी ने जमकर तारीफ की।
हमारे मां-बाप भी पेंसिल रबड़ की तरह होते हैं
पाठशाला के द्वारा कराई गई परीक्षाओं के परिणाम जारी करते हुए उन्हें पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर शिविर में भाग लेने वाले सभी शिविर में भाग लेने वाले सभी सदस्यों को पुरस्कृत किया गया। समारोह का संचालन प्रशांत जैन आचार्य ने किया। इस अवसर पर समस्त विद्वानों ने शिविर की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। विनोद जैन आचार्य ने कहा कि इस शिविर की उपयोगिता क्या रही इसका आकलन आप स्वयं को करना है। बच्चों में संस्कार माता-पिता द्वारा परोसे जाते हैं उन्होंने कहा कि जो माता-पिता करते हैं वही बच्चे करते हैं यदि माता-पिता मंदिर आते हैं तो बच्चा भी मंदिर आता है। उन्होंने कहा कि शिविर संस्कारों का शंखनाद है। हेमंत जैन ने कहा कि मित्रता में समय याचना धन्यवाद नहीं किया जाता। हमारे जीवन में दो किरदार पेंसिल रबर होते हैं। उन्होंने कहा कि पेंसिल रबर मामूली वस्तु है। हमारे मां-बाप भी पेंसिल रबड़ की तरह होते हैं। यह हमारी गलतियों को मिटाने का प्रयास करते हैं और रबड़ की तरह साफ कर देते हैं। हमें गलतियों को मिटवाना है।
शिविरार्थियों को पुरस्कृत कर सम्मान किया
समापन समारोह की बेला में शिविर के अंतर्गत ली गई परीक्षाओं के परिणाम घोषित करते हुए पुरस्कृत किया गया। जिसमें बालबोध भाग प्रथम में म्यारा लुहाड़िया, अयांश, जैनिशा, जैना, हितार्थ, आर्ची जैन को पुरस्कृत किया गया। बालबोध भाग 2 में प्रथम स्थान राजवर्धन सांवला द्वितीय स्थान मीठी जैन, तृतीय स्थान धृति जैन ने प्राप्त किया। प्रश्नोत्तर रत्नमालिका कनिष्ठ वर्ग में प्रथम रक्षित जैन, द्वितीय स्थान नियति जैन, तृतीय स्थान गविक जैन को प्राप्त हुआ। प्रश्नोत्तर रत्नमालिका वरिष्ठ वर्ग में प्रथम अंतिमा जैन, द्वितीय स्थान आदिश जैन, तृतीय स्थान हर्षिता जैन को प्राप्त हुआ। शिविर का मुख्याकर्षण मूकमाटी कक्षा रही जिसके रजत पुरस्कारों का पुण्यार्जन श्री शांतिनाथ पाठशाला रामगंजमंडी ने किया मूकमाटी महाकाव्य परीक्षा में प्रथम स्थान मनीषा जैन गर्ग द्वितीय स्थान रेखा जैन शाह तृतीय स्थान कृतिका जैन को प्राप्त हुआ। सांयकालीन कक्षा आर्ट एंड क्राफ्ट में सहयोग देने के लिए सुश्री स्वाति जैन बागड़िया का एवं रक्षिता जैन लुहाड़िया का सम्मान किया गया। साथ ही शिविर को मीडिया के माध्यम से हर स्थान पर पहुंचाने के लिए अभिषेक जी लुहाड़िया का सम्मान किया गया।













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