समाचार

शांत रहें, मीठा बोलें और सबसे प्रेम करें: जीने की कला पर प्रवचन माला का धूमधाम से समापन


सारांश

भीलवाड़ा के शांति भवन में राष्ट्रसंत ललितप्रभजी ने जीवन की माधुर्यता पर प्रकाश डालते हुए सुखद जीवन जीने का उपाय बताया। हजारों लोगों ने क्रोध नहीं करने का संकल्प लिया। महावीर जैन की पढ़िए खबर विस्तार से…।


भीलवाड़ा। राष्ट्र-संत श्री ललितप्रभ जी महाराज ने कहा है कि व्यक्ति अपनी जिंदगी में अगर ये तीन फैक्ट्रियां- पहली अपने माथे या दिमाग के प्लॉट पर आईस फैक्ट्री, दूसरी अपनी जुबान के प्लॉट पर शुगर फैक्ट्री और तीसरी का प्लॉट हृदय है, जहां आदमी लव फैक्ट्री खोल ले तो उसकी जिंदगी मालामाल हो जाएगी। दिमाग में खोली आईस फैक्ट्री के मालिक बनकर हमेशा कूल-कूल रहें, जुबान पर खोली शुगर फैक्ट्री के मालिक बन सदा मीठा-मुधर बोलें और हृदय रूपी प्लॉट पर खोली प्रेम या लव की फैक्ट्री का मालिक बन सबसे प्रेम करें। ये तीन फैक्ट्रियों का जो मालिक बन जाता है उसकी पूरी जिंदगी प्रेम, माधुर्य और आनंद से भर जाती है। हमेशा कूल रहें, मीठा बोलें और सबसे प्रेम करें। ये तीन मंत्र आपकी जिंदगी को आनंद और माधुर्य से भर देंगे।

-कैसे बनाएं जीवन को मालामाल- विषय पर संबोधन
संत प्रवर रविवार को आध्यात्मिक प्रवचन समिति द्वारा हेड पोस्टऑफिस के सामने शांति भवन में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम के दौरान -कैसे बनाएं जीवन को मालामाल- विषय पर हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा वालों ने हमारा दिल जीत लिया है। हम यहां की श्रद्धा- भक्ति को नमन करते हैं और शीघ्र ही एक विराट चातुर्मास भीलवाड़ा में करने की भावना रखते हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी क्षेत्र में कार्यरत हो, यदि वह अपनी जिंदगी में नम्रता, विनयशीलता का व्यवहार रखे, जब भी बोले मीठा-मधुर भाषा बोले और हृदय में सबके लिए सदा प्रेम बनाए रखे तो उसकी जिंदगी मालामाल हो जाएगी। अक्सर आदमी का मस्तिष्क हमेशा गर्म बना रहता है। जरा सा कोई उसका अपमान कर दे तो दो मिनट में वह अपना आपा खो देता है। आदमी सबसे ज्यादा कर्मबंध अपने गर्म दिमाग से करता है। जब भी कोई आपको विपरीत बात कहे, आपकी आलोचना करे तब अपनी शांति बनाए रखें, सामने वाले के शब्दों को भीतर न आने दें। जो चीज आप स्वीकार नहीं करते, वह सामने वाले के पास ही रहती है।

एक-दूसरे को सुधारने से पहले स्वयं सुधरे

संतप्रवर ने कहा कि सरल व नम्र स्वभाव हमारी कमजोरी नहीं है, बल्कि यह हमारी ऊंची सोच व अच्छे संस्कारों का परिचायक है। अन्यथा जो सुन सकता है, वो आदमी बोल भी सकता है। जब भी ऐसी प्रतिकूल स्थिति आए तो भगवान महावीर के कथन- हे जीव अब तो शांत रह, का स्मरण करें। विपरीत वातावरण तो सबकी जिंदगी में आता ही है। दूसरे को सुधारने के फेर में रहने की बजाय पहले खुद को सुधारें, सामने वाला भी एक दिन आपसे प्रभावित हो स्वयं ही थोड़ा न थोड़ा सुधर ही जाएगा। आदमी की पहली भूल यही है कि वह एक-दूजे को सुधारने में लगा रहता है। सुधारने की कार्रवाई जब भी हो तो आदमी उसकी शुरूआत खुद से करे। जब-जब सामने वाला आपके मन में कसाय पैदा करे तब-तब इस बात को जरूर याद करें कि इसके साथ तो मेरी बहुत छोटी-सी यात्रा है।

सातों दिन अपने गुस्से को रखें काबू
अपने गुस्से को सदा काबू रखने की सीख देते हुए संतप्रवर ने कहा- सोमवार को अगर गुस्सा आए तो उस दिन को सप्ताह का पहला दिन मानकर गुस्सा न करें, मंगलवार को गुस्सा आए तो मंगल को मैं अमंगल नहीं बनाउंगा सोचकर गुस्सा न करें, बुधवार को गुस्सा आए तो बुध के दिन युद्ध नहीं कहकर शांत रहें, गुरुवार को यदि क्रोध आ जाए तो गुरुदेव का वार मानकर गुस्सा न करें, शुक्रवार को शुक्राना अदा करने-धन्यवाद कहने का दिन मानकर गुस्सा न करें, शनिवार को शनि हावी हो जाएंगे यह जानकर गुस्सा बिलकुल न करें और रविवार को गुस्से की छुट्टी का दिन मानकर प्रसन्नता से भरे रहें।

क्रोध में जीओगे तो संसार में डूबोगे

महाराष्ट्र के संत तुकाराम और यूनान के महान दार्शनिक सुकरात के गृहस्थ जीवन का वृतांत सुनाते हुए संतश्री ने धर्मानुरागियों को सदा शांत-कूल रहने की प्रेरणा दी। कहा कि आज से जीवन का यह मंत्र बना लें कि मैं जब भी बोलूंगा, शांतिपूर्वक सोचकर ही बोलूंगा। भगवान महावीर ने विषधर सर्प चण्डकौशिक को केवल एक शब्द कहा था-बुज्झ। यानि बोधि को प्राप्त कर। क्रोध में जीओगे तो संसार में डूबोगे और बोध में जीओगे तो मुक्ति मंजिल की ओर बढ़ जाओगे।

गलती होना प्रकृति और गलती न सुधारना विकृति है

संतश्री ने कहा कि अपने घर के माहौल को आनंदमयी बनाने के लिए इस बात को जीवन में अपना लें कि आप जैसा व्यवहार अतिथियों से करते हैं, वैसा ही व्यवहार अपने घर वालों से भी करें। फिर कभी घर में कलह हो जाए तो कहना। उन्होंने कहा- गलती होना हमारी प्रकृति है पर गलती को ना सुधारना या ना स्वीकारना यह हमारी विकृति है। और गलती हो जाने पर सॉरी कहना यह हमारे भारत की संस्कृति है। क्षमा का परिणाम हमेशा मीठा होता है। क्षमा और प्रेम की गंगा में जब आदमी नहाता है तो उसका मन पवित्र हो जाता है। आदमी का दो मिनट का गुस्सा उसके पूरे कॅरियर पर, बरसों के रिश्तों पर पानी फेर देता है। जीवन में एक बात हमेशा याद रखना कि बिगड़े हुए रिश्ते भी तब बन जाते हैं जब आप प्रेम से बोलते हैं और बने हुए रिश्ते भी तब बिगड़ जाते हैं जब आप टेढ़ा, तीखा-कडुवा बोलते हैं। टेढ़ा बोलना दीवारों पर कील ठोंकने जैसा होता है, कील निकल जाती है मगर उसका निशान बना रह जाता है। प्रेमपूर्वक बोलों से प्रेम के पुल खड़े हो जाते हैं तो कडुवा बोलने से द्वेष की दीवारें खड़ी हो जाती हैं। मीठा-मधुर और हितकारी बोलें, क्योंकि बोलने की शालीनता से आदमी की कुलीनता की पहचान होती है। एक बार इज्जत देकर मधुर जबान से बोल कर तो देखो, आपके बिगड़े रिश्ते कैसे संवर-सुधर जाते हैं। अपने हृदय में सर्वदा सबके लिए प्रेम रखें। ये दिवाली आए तो अपने कर्मचारियों को केवल सामान मत देना, अगर दे सकते हो तो उन्हें गले लगाकर सम्मान जरूर देना। दिया हुआ सामान तीन महीने में खत्म हो जाएगा पर आपने गले लगाकर उसे जो सम्मान दिया, उसे वह जीवनभर याद रखेगा। क्या बोलना, कैसे बोलना इसका सदा विवेक रखें। रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर न मिले, मिले गाँठ परिजाय।। हमें पता है- स्कूलों में लिखा रहता है, ऊसूल मत तोड़िए। बगीचों में लिखा रहता है- कृपया फूल मत तोड़िए। और खेलों में सिद्धांत होता है- रूल मत तोड़िए। आज मैं यह कहता हूँ- जिंदगी में कभी किसी का दिल मत तोड़िए।

प्रेम नहीं तो इंसान-जानवर में कोई फर्क नहीं
नम्रता, माधुर्य और प्रेम इन तीन सूत्रों के जीवन में महत्व को संतश्री ने एक रोचक दृष्टांत से स्पष्ट करते बताया कि एक बार जानवरों के दल और मनुष्य दल में श्रेष्ठ कौन है, विषय पर आमने-सामने वाद-विवाद स्पर्धा हुई। जब इंसानों ने अपनी सुंदर आंखों की तारीफ बताई तो जानवरों ने हिरणी को सामने खड़ा कर दिया और कहा तुम्हारे समाज में सुंदर आंखों की उपमा मृगनयनी कहकर दी जाती है। फिर इंसानों ने स्वयं को मीठी भाषा बोलने वाला बताया तब जानवरों ने कोयल को आगे कर कहा, मधुर वाणी की उपमा आप लोग कोकिला कहकर देते हैं, तो आपमें और हममें श्रेष्ठ कौन। इसी तरह बहादुरी की बात आने पर शेर को खड़ा कर दिया गया, फिर इंसानों ने 380 किलो के मोटे पहलवान को खड़ा किया तो जानवरों ने हाथी को सामने लाकर कहा- आप लोग पहलवान की उपमा हाथी जैसा बल से देते हैं। फिर इंसानों ने विश्वसुंदरी को सामने लाया तो जानवरों ने मोर को आगे कर दिया। बाजी हारते देख इंसानों ने दाव खेला और कहा कि हम इंसान सात्विक और निर्मल भोजन करते हैं तब जानवरों ने हंस को आगे कर दिया। फिर इंसानों ने अपनी विशेषता बताते कहा कि हम सब हिल-मिलकर खाते हैं, जानवरों ने जवाब दिया कि हमें पता है आप लोग पराया माल हो तो हिल-मिलकर खाते हैं और खुद का माल हो तो अकेले में खाते हैं। तब आदमियों ने कहा कि हम परिवार के रूप में साथ-साथ रहते हैं तो जानवरों ने सुअर को आगे बुलाया। इंसानों ने अपना आखिरी दाव खेला और कहा- हम सब आपस में हिल-मिलकर प्रेम से रहते हैं। इस पर जानवर दल कुछ झुका और उनके मुखिया ने कहा- यह बात सच है कि जब तक तुम लोग प्रेम से रहते हो तब तक तुम हमसे ऊपर हो, लेकिन जिस दिन तुम्हारे जीवन से प्रेम निकल जाता है उस दिन तुममें और हममें कोई फर्क नहीं होता।

सुखी जीवन का मंत्र- एवरीथिंग इज पॉसीबल: डॉ. मुनि शांतिप्रियजी
पूर्वार्ध में डॉ. मुनिश्री शांतिप्रिय सागरजी ने जीवन जीने की कला का सूत्र देते हुए कहा कि यदि जीवन को आनंदमय बनाना है तो जिंदगी का यह मंत्र बना लें- एवरीथिंग इज पॉसीबल। इस दुनिया में कुछ भी इम्पॉसीबल नहीं। अगर आप चाहें तो सब कुछ संभव है। क्योंकि इम्पॉसीबल में ही पॉसीबल छिपा हुआ है। अक्सर व्यक्ति अपने मन में बनाई हुई कमजोर धारणों के कारण कुछ कर नहीं पाता। जैसे भौंरा शरीर से भारी होकर और पंख छोटे होते हुए भी बचपन से उड़ने की तमन्ना लिए एक दिन उड़ने में जरूर कामयाब हो जाता है। वैसे ही अपने इरादों को, हौसलों को हमेशा ऊंचा बनाए रखें एक दिन सफलता जरूर मिलेगी। क्योंकि जैसी हमारी धारणा या भावना होती है, वैसे ही परिणाम भी मिलने शुरू हो जाते हैं। हम वह सब कुछ कर सकते हैं, जैसा हम सोचते हैं। बशर्तें आपका मार्ग और लक्ष्य कल्याणकारी-हितकारी हो। जीवन में सब कुछ पाना संभव है, यदि आप अपनी मेहनत व लगन से उसे हासिल करने जी-जान से जुट जाएं। एवरीथिंग इज बेस्ट और इवरीथिंग इज पॉसीबल के ये दो मंत्र यदि जीवन में आ जाएं तो हम सुखी-सफल जीवन के मालिक बन सकते हैं।

मंच संचालन नाथूलाल जैन ने किया। इस अवसर पर समाजसेवी महावीर चौधरी परिवार द्वारा सभी श्रद्धालुओं को साहित्य का उपहार दिया गया। गुरु भक्ति पर भजन सुमन सोनी ने प्रस्तुत किया।

राष्ट्रसंतों ने किया जोधपुर की ओर मंगल प्रस्थान

संत प्रवर ने मंगल पाठ प्रदान करके जोधपुर की ओर मंगल प्रस्थान किया। वे विजयनगर और ब्यावर होते हुए 3 फरवरी को जोधपुर के संबोधि धाम पहुंचेंगे जहां पर उनके मंगल प्रवेश में भीलवाड़ा जिले से अनेक श्रद्धालु शरीक होंगे।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
4
+1
1
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page