अक्षय का मतलब जिसका क्षय (नाश) नहीं होता है इसीलिए इस दिन शुभ कार्य का शुरुआत की जाती है। जैन समाज ने श्री जैन वीर मंडल कुचामन सिटी के तत्वावधान में गो माता, बेजुबान पक्षियों, दिव्यांग सेवा की। कुचामनसिटी से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की यह खबर…
कुचामन सिटी। युग प्रवर्तक देवाधिदेव श्री 1008 भगवान आदिनाथ को एक वर्ष पश्चात प्रथम आहार राजा श्रेयांस के यहां होने से दान देने की प्रथा की शुरुआत हुई थी। अक्षय तृतीया पर दान दिवस के रूप में प्रारंभ हुई थी। इसलिए इस दिन का सभी धर्मों में बड़ा महत्व है। 30अप्रैल को जैन समाज ने श्री जैन वीर मंडल कुचामन सिटी के तत्वावधान में उप सचिव अशोक ममता झांझरी, पवनकुमार गोधा, अशोक कुमार अजमेरा के सानिध्य में गोमाता, बेजुबान पक्षियों, मानव दिव्यांग सेवा की। कुचामन गोशाला, शाकम्भरी गोशाला, समरिया सागर गोशाला में सुबह 7 से 9 बजे तक हरा चारा, गुड पानी के टैंकर डलवाकर जीवदया सेवा की। अन्नपूर्णा रसोई में सुबह सायंकाल मिठाई खिलाकर 200 लोगों को भोजन करवाया गया। लाचार, बीमार, असहाय जन का आवास अपना घर में सभी 73 प्रभुजी को मिठाई के साथ अल्पाहार, दोनों समय का भोजन, मूक बधिर, नेत्रहीन आवासीय सम्पर्क संस्थान के 30 बालक बालिकाओ को भोजन करावया गया। बेजुबान पक्षियो के लिए ज्वार दाना खिलाकर व परिन्डे लगाए।
इन्होंने किया सहयोग
श्रावक श्रेष्टी स्व शान्ति देवी स्व घर्मचन्द छाबडा की पुत्री और परिवार किरण प्रकाश चन्द, ममता नवीन कुमार, मोनिका सोनु काला परिवार सीकर, अगुल (उडीसा ), नंदकिशोर देवी धर्म पत्नी स्वरुप चन्द पाडया परिवार मैना देवी कमल कुमार पहाडिया परिवार ममता पंकज की शादी वर्षगांठ पर दान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम सुरेश जैन, अशोक गोघा, तेजकुमार बड़जात्या, कमल दादा अजित, ममता-पंकज, स्वाति सैयांश पहाडिया, कपूरचंद जैन. राहुल, पारस झाझरी, शुभम काला, अंकित नीता, रम्यक पाडंया, नंदकिशोर बिडला, रवि भार्गव ने सेवा कार्यो में सहयोग किया।













Add Comment