अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का शुक्रवार काे तिलक नगर मंदिर से विहार और श्री दिगंबर 1008 शांतिनाथ मंदिर गोयल नगर मंदिर में मंगल प्रवेश हुआ।इस अवसर पर धर्म सभा काे संबाेधित करते हुए उन्होंने कहा कि संसार में कोई भी अपने दु:ख से दु:खी नही है, सभी पड़ोसी के सुख से दुःखी हैं। दूसरों को देखने का समय है, अपने Sale को, अपने कर्मों को देखने का समय क्यों नहीं है। हम अपने भावों से ही स्वयं कर्म बांधते और कर्म काटते हैं। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि पूजा, दान, स्वाध्याय करने से महत्वपूर्ण है इसे विधि विधान और विनय से करना। बिना विधि विधान की गई पूजा आदि दुःख का कारण हो सकती है। पूजा आदि धार्मिक अनुष्ठान करते समय कषाय हो जाए तो पूजा करना छोड़ देना चाहिए। आज श्रावक इतने ज्ञानी हो गए है कि वह दूसरों को अपना कर्तव्य बताते हैं पर उन्हें अपना स्वयं का कर्तव्य नहीं पता कि क्या करना है। उन्होंने कहा कि दूसरों को देखने के बजाए अपने आप को देखना चाहिए तभी पुण्य का संचय होता है। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का शुक्रवार काे तिलक नगर मंदिर से विहार और श्री दिगंबर 1008 शांतिनाथ मंदिर गोयल नगर मंदिर में मंगल प्रवेश हुआ।
मुनि श्री की हुई अगवानी
इस वसर पर धर्म सभा काे संबाेधित करते हुए उन्होंने कहा कि संसार में कोई भी अपने दु:ख से दु:खी नही है, सभी पड़ोसी के सुख से दुःखी हैं। दूसरों को देखने का समय है, अपने आप को, अपने कर्मों को देखने का समय क्यों नहीं है। हम अपने भावों से ही स्वयं कर्म बांधते और कर्म काटते हैं। दूसरे के कहने से कुछ होने वाला नहीं है। दूसरों की कमी देखने से अशुभ कर्म का ही बंध होता है। उन्होंने कहा कि देव, शास्त्र व गुरु की नित्य पूजा करनी चाहिए। इससे पहले मंगल प्रवेश पर समाज की ओर से मुनि श्री की अगवानी की गई। मंदिर में पहुंचने पर समाज जनाें द्वारा महाराज का पाद प्रक्षालन किया गया। उसके बाद भगवान की शांतिधारा की गई। धर्म सभा में मुनि श्री को राजेश जैन, राकेश जैन, नरेंद्र रावका, चंद्रकांत बंडी, सुशील पतंग्या ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। धर्म सभा का संचालन अध्यक्ष दिलीप, प्रमिला पाटनी द्वारा किया गया।













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