छोटा बांगडदा रोड स्थित हाई लिंक सिटी में मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने दिगंबर जैन मुनि सुव्रतनाथ जिनालय में निर्मित नूतन वेदी की शुद्धि एवं जिन बिंब विराजमान समारोह में धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि छुपकर किए गए कार्य न केवल पाप की श्रेणी में आते हैं बल्कि जीवन में संकलेषता बढ़ाते हैं और मरण समय तक दुख और शल्य देते हैं। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर। छुपकर किए गए कार्य न केवल पाप की श्रेणी में आते हैं बल्कि जीवन में संकलेषता बढ़ाते हैं और मरण समय तक दुख और शल्य देते हैं। यदि अपनी मृत्यु को मांगलिक एवं महोत्सव बनाना और दुर्गति से बचना है तो जीवन पर्यंत छल रहित, धर्म ,दया और विनय से समन्वित शल्य और आकांक्षा रहित जीवन जीने का पुरुषार्थ करो। यह उद्गार गुरुवार को छोटा बांगडदा रोड स्थित हाई लिंक सिटी में मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने दिगंबर जैन मुनि सुव्रतनाथ जिनालय में निर्मित नूतन वेदी की शुद्धि एवं जिन बिंब विराजमान समारोह में धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

ये हुए कार्यक्रम
प्रारंभ में मुनिश्री आदित्य सागरजी, मुनिश्री अप्रमितसागरजी एवं मुनि श्री सहजसागरजी के सानिध्य एवं विधानाचार्य पंडित नितिन झांझरी के निर्देशन में भक्तामर विधान किया गया। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण श्री महेंद्र पहाड़िया, डॉक्टर जैनेंद्र जैन, राजेश जैन दद्दू ने किया। दीप प्रज्वलन देवेंद्र सेठी, दिलीप रत्नावत, निकेतन सेठी एवं ललित जैन ने किया। हाइलिंक सिटी महिला मंडल ने मुनि संघ को शास्त्र भेंट किए। समारोह का संचालन अर्पित वाणी ने किया। इस अवसर पर चिराग गोधा, अतिशय सोनी, पारस बड़जात्या, राकेश शाह, मयंक जैन एवं अंकिता जैन, श्वेता अजमेरा आदि उपस्थित थे।













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