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तीर्थंकर नाम कर्म के बंध के लिए सातिशय पुण्य जरूरी : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी


सलूंबर में आयोजित धर्म सभा में आचार्य शिरोमणि वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा की जो प्राणी दर्शन,विशुद्धि सोलह कारण भावना का चिंतन जीवन में करते हैं ,जगत के प्राणी सुखी कैसे हो ये मंगल भावना करते हैं वह जीव तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंघ करते हैं। पढ़िए राजेश पंचोलिया इंदौर की रिपोर्ट


सलूंबर। जो प्राणी दर्शन,विशुद्धि सोलह कारण भावना का चिंतन जीवन में करते हैं ,जगत के प्राणी सुखी कैसे हो इस मंगल भावना करते हैं वह जीव तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंघ करते हैं। प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ से लेकर अंतिम तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी सभी 24 तीर्थंकर ने तीर्थंकर नाम प्रकृति का बंघ किया। पंचकल्याणक में नाटकीय दृश्य से धर्म के संस्कार दिए जाते हैं। यह मंगल देशना सलूंबर में आयोजित धर्म सभा में आचार्य शिरोमणि वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रगट की। बाल ब्रह्मचारी गजू भैय्या, राजेश पंचोलिया इंदौर अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि तीर्थंकर सहित सभी प्राणी संसार के चारों गति के अनेक भवों में भ्रमण कर मनुष्य गति में आते हैं । तीर्थंकर प्रभु की दिव्य देशना से धर्म प्रवर्तन होता है ।

आज आपको धर्म की वाणी सुनने का आसानी से अवसर मिल रहा है किंतु श्री आदिनाथ भगवान के पूर्व 18 कोड़ा कोड़ी वर्षो तक धर्म की वाणी की देशना नहीं हुई ।इसलिए धर्म को समझने का प्रयास करना चाहिए आमोद प्रमोद से समय नष्ट होता है पंचकल्याणक में जो नाटकीय दृश्य दिखाए जाते हैं उससे धर्म के संस्कार दिए जाते हैं । सलूंबर नगर का भाग्य है कि 20 वर्षों बाद आचार्य संघ का मंगल प्रवेश सलूंबर नगर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा हेतु हुआ है । इसके पहले सलूंबर में निजी चेत्यालय में 40 प्रतिमाओं का पंचकल्याणक हमारे सानिध्य में हुआ था ।

सलूंबर के निवासी नागपुर ,अकोला, मुंबई, अहमदाबाद आदि नगरों में निवास कर रहे हैं यद्यपि पंचकल्याणक को अभी देरी है, किंतु समाज का उत्साह सराहनीय है ,पंचकल्याणक में प्रतिष्ठाचार्य और आचार्य संघ के सानिध्य में पाषाण को ,पत्थर को भगवान बनाने की मांगलिक क्रिया 5 दिनों तक गर्भ, जन्म, तप ,ज्ञान और मोक्ष कल्याणक के माध्यम से होगी ।आप में से अनेक व्यक्ति भगवान के माता-पिता , साधर्म इंद्र, कुबेर और अन्य पात्र बने हैं हमें स्मरण में आता है कि 2004 में संघ ने चातुर्मास किया था तब श्रवण बेलगोला में श्री आदिनाथ भगवान के पुत्र श्री बाहुबली भगवान के महामस्तकाभिषेक के लिए संघ ने इसी नगर से विहार किया था ।

संघ के सानिध्य में सन 1993 वर्ष 2006 एवं वर्ष 2018 में विश्व प्रसिद्ध श्री बाहुबली भगवान का महामस्तकाभिषेक संपन्न हुआ । सलूंबर का यह कार्य सराहनीय है कि यहां 500 वर्ष प्राचीन श्री आदिनाथ भगवान के जिनालय का जिर्णोद्धार कार्य समाज कर रही है , नए मंदिरों की प्रतिष्ठा काफी होती है किंतु देश में प्राचीन मंदिरों का क्षेत्र का जीर्णोधार बहुत कम समाज करती है।

सलूंबर में जनवरी में होगी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा
प्रभुलाल,मनोहर लाल,शांतिलाल ने बताया आगामी वर्ष 2024 जनवरी माह में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा सलूंबर में होगी । आचार्य श्री ने आगे उपदेश में बताया कि पंच कल्याणक कार्यक्रमों में सभी को तन मन धन से भाग लेकर सातिशय पुण्य का अर्जन करना चाहिए क्योंकि पंचकल्याणक धर्म वृद्धि के कार्यक्रम होते हैं , यहां आमोद प्रमोद के कार्य नहीं होते। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने वर्ष 2024 में प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के आचार्य पद के 100 वर्ष पूर्ण होने पर शताब्दी महोत्सव की जानकारी देते हुए बताया कि आगामी वर्ष 2024 अक्टूबर माह से वर्ष 2025 तक पूरे भारत में आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद शताब्दी महोत्सव मनाया जाना है ।

आचार्य शांति सागर जी महाराज ने धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए अपने प्राणों को भी खतरे में डाल दिया था 1105 दिनों तक अन्न आहार का त्याग कर जिनालय और धर्म पर आए संकट को उस समय अकेले आचार्य ने कटिबंध होकर दूर किया। समाज पुराना इतिहास भूल रही है ,अपना गौरव भूल रही है । आपको गौरव के साथ आचार्य पद शताब्दी महोत्सव में उत्साह से सहयोगी बनकर जीवन को सार्थक करने का प्रयास करना चाहिए। आपके जीवन में धर्म की अभिवृद्धि हो और जीवन में संयम प्राप्त करने की भावना जागृत हो ऐसी मंगल भावना करते हैं।

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