महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर, डी ब्लॉक, कमला नगर आगरा में मुनि श्री सुधासागर महाराज के सानिध्य में सूर्यमंत्रित जिनालय में प्रतिष्ठित जिन प्रतिमाओं का स्वर्ण कलशों से महावीर भगवान, श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक कर महाशांतिधारा महामहोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर मुनिश्री के प्रवचन भी हुए। पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट…
आगरा । महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर, डी ब्लॉक, कमला नगर आगरा में मुनि श्री सुधासागर महाराज के सानिध्य में सूर्यमंत्रित जिनालय में प्रतिष्ठित जिन प्रतिमाओं का स्वर्ण कलशों से महावीर भगवान, श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक कर महाशांतिधारा महामहोत्सव मनाया गया। धर्मसभा का प्रारम्भ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर हुआ। जिसमें परिवार ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन कर मुनिश्री को शास्त्र समर्पित किए। मंच का संचालन मनोज जैन ने किया।
णमोकार मंत्र की महिमा अपरम्पार
कार्यक्रम में निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज जी ने कहा सती सीता ने भी पढ़ा णमोकार मंत्र अग्नि कुंड के सामने इसलिए नही कि अग्नि ठंडी हो जाये, बस यदि प्राण भी निकलेगे तो णमोकार मंत्र पढ़ते हुए निकलेंगे l संसार में एक भी वस्तु ऐसी नहीं है जिसका प्रतिपक्ष न हो, प्रकाश है तो अंधेरा कहीं ना कहीं है, धर्म है तो अधर्म कहीं न कहीं हैं, साधु हैं तो डाकू भी कहीं न कहीं हैं । पाप और पुण्य दोनों का अस्तित्व है, ये दोनों एक साथ राज्य कभी नही कर पाए। कर्म संसार बनाता है, धर्म संसार से ऊपर उठाता है। यह दोनों की खींचातानी में जीव की दुर्दशा हो रही है।
धर्म कहता है कि मैं अपनी मेजोरिटी कम नहीं करूँगा, जो मेरी शरण में आएगा, उसको मैं संसार मे रहने नही दूँगा। कर्म से कहता है कि मैं तेरे चंगुल में नही रहने दूँगा क्योंकि तू बदमाश है, लोभ देता है सुख का और गिरा देता है दुःख में। इन मंदिरों को, गुरुओं को आवश्यकताओ की पूर्ति के साधन मत बनाना क्योंकि तुम जैसे जैसे आवश्यकता की पूर्ति के साधन बनाओगे, तुम कर्मचारी को दस हजार रुपया देते हो, तुम्हारा दुश्मन बीस हजार पकड़ा देगा क्या करोगे तुम, वो किसकी बात मानेगा। अपने से कमजोर व्यक्ति पर कभी अपनी दादागिरी मत दिखाना, अपने से कमजोर व्यक्ति का शोषण कभी मत करना, क्रोध मत करना, ये तुरंत तो शान्त बैठ जाएगा लेकिन अंदर गांठ बांध लेगा और कितने भवो तक पेरेगा।
अपने से बलजोर से झगड़ा कर लोगे वो तुंरत निपटा देगा, दो थप्पड़ मारके, भवांतर में परेशान नही करेगा। कभी भी तुम्हे ऊपरी बाधाओं का, देवताओं का लगे कि यहाँ कोई भूत पलीत है, कुछ नही करना, आप णमोकार मंत्र पढ़ना शुरू कर देना, कोई देवता तुम्हे छू भी नही सकेगा, बस णमोकार मंत्र मत छोड़ना, आगम का प्रमाण है। लोग पहले धर्म पर अतिविश्वास कर लेते है कि मैं णमोकार मंत्र पढ़ रहा हूँ, कुछ नही होगा जब वो विश्वास टूटता है तो तुम्हे चिड़चिड़ापन आ जाता है, इसलिए णमोकार मंत्र संकट दूर करने के लिए नही पढ़ना, क्या भाव करना संकट की घड़ी में भगवान का नाम लेते हुए मैं यह संकट की घड़ी गुजारना चाहता हूँ।
मैं और मेरा भक्त संकट की घड़ी में आर्त-रौद्रध्यान में न जाये, वो संकट की घड़ी धर्मध्यान में बीते इसलिए मैं माला फेरता हूँ, इसलिए मैं शांतिधारा पढ़ता हूँ, वो मरता ही नही। कर्मो को दिखा दो कि दुख के दिनों में धर्म छूट जाए तो छूट जाए, कह नही सकता क्योंकि सहनशक्ति नही है लेकिन सुख के दिनों में तू मुझे भगवान से दूर नही कर पायेगा, गरीबी में धर्म से दूर हो सकता हूँ लेकिन अमीरी मुझे धर्म से दूर नही कर पायेगी।

ये रहे मौजूद
सभा में प्रदीप जैन पीएनसी, चक्रेश जैन पीएनसी, योगेश जैन पीएनसी, जगदीश जैन अध्यक्ष आगरा दिगंबर जैन परिषद, मनोज जैन बाकलीवाल,पारस बाबू जैन,नीरज जैन, अनिल जैन रईस, अनिल जैन एफसीआई, नरेश जैन लुहाड़िया, समकित जैन मीडिया प्रभारी राहुल जैन एवं सकल जैन समाज मौजूद था l













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