जैन समाज की विदुषी महिला सरला जैन सांसारिक मोह माया को छोड़कर 5 जुलाई को अरिहंतगिरी में जैनेश्वरी क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर जैन साध्वी बनने जा रही हैं। आपके जीवनसाथी सुमतिचंद जैन भी अभी कुछ समय पूर्व आचार्य श्री सुविधिसागर जी महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहणकर मुनिश्री 108 सुभूषणसागर नाम पाकर घोर तप करते हुए इस नश्वर शरीर का त्यागकर मोक्षगामी हो गए। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। जैन समाज की विदुषी महिला सरला जैन सांसारिक मोह माया को छोड़कर 5 जुलाई को अरिहंतगिरी में जैनेश्वरी क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर जैन साध्वी बनने जा रही हैं। मध्यप्रदेश के मुरैना में लोहिया बाजार निवासी श्रावक श्रेष्ठि भंडारी गोत्रीय स्व.श्री रामरतन जैन (गोसपुर वाले) की पुत्रवधु सरला जैन (हाल निवासी चेन्नई) धर्मपत्नी स्व. सुमतिचंद जैन “मास्टर सहाब” (समाधिस्थ मुनिश्री सुभूषणसागर जी महाराज) ने इस सांसारिक सुख सुविधाओं एवं पारिवारिक मोह को त्यागकर संयम के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया है। आपके जीवनसाथी सुमतिचंद जैन भी अभी कुछ समय पूर्व आचार्य श्री सुविधिसागर जी महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहणकर मुनिश्री 108 सुभूषणसागर नाम पाकर घोर तप करते हुए इस नश्वर शरीर का त्यागकर मोक्षगामी हो गए।
संयम पथ पर चलने का संकल्प
परम पूज्य गुरुदेव विद्यावाचस्पति आचार्य श्री 108 सुविधिसागर जी महाराज के करकमलों से दीक्षार्थी बहिन सरला जैन की क्षुल्लिका आर्यिका दीक्षा 5 जुलाई 20230 को प्रातः 10 बजे तमिलनाडु प्रांत में तिरुमलाई जिले के अरिहंतगिरी में सम्पन्न होगी। ब्रह्मचारिणी सरला जैन ने सन 2015 में आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेकर संयम के पथ पर चलने का दृढ़ संकल्प लिया था। एक सवाल के जवाब में दीक्षार्थी सरला जैन ने बताया कि आत्मकल्याण, स्त्री पर्याय छेदन की पवित्र भावना के साथ में जैनेश्वरी दीक्षा स्वीकार कर रही हूं।

परिचय
दीक्षार्थी सरला जैन का जन्म 01 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश ताज नगरी आगरा (नाई की मंडी) में दिगम्बर जैसवाल जैन उपरोचियां समाज के श्रावक श्रेष्ठि घीया गोत्रिय मुन्नालाल जैन सराफ के यहां माता भगवानश्री जैन की कुक्षी से हुआ था। आप 3 भाई व 5 बहनें हैं। आप के.के.जैन चांदी वाले (कमलानगर) आगरा की बड़ी बहिन हैं। आपके परिवार में 4 पुत्र, 4 पुत्रियां, पुत्रवधुओं, नातियों सहित भरा-पूरा परिवार है। पारिवारिक मोह भी आपको घर में नहीं रोक पाया। आप सभी सांसारिक सुखों का त्यागकर जैनेश्वरी क्षुल्लिका आर्यिका दीक्षा ग्रहण कर रही हैं ।













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