मुरैना शहर के लोहिया बाजार निवासी स्व.रामरतन जैन भंडारी (गोसपुर वाले) की पुत्रवधू सरला जैन धर्मपत्नी स्व.श्री सुमतिचंद जैन मास्टर साहब ने बुधवार 5 जुलाई को अरिहंतगिरी (तिरुमलाई) तमिलनाडु में दिगम्बराचार्य विद्यावाचस्पति श्री सुविधिसागर की महाराज, आचार्य श्री गुलावभूषण जी महाराज, भट्टारक श्री धवलकीर्ति जी के पावन सान्निध्य में आर्यिका श्री सुविधिमति माताजी के करकमलों से जैनेश्वरी क्षुल्लिका आर्यिका दीक्षा ग्रहण की। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। जैन परिवार की विदुषी महिला सरला जैन ने सांसारिक सुखों एवं गृह त्यागकर जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षा ग्रहणकर आर्यिका श्री सुभूषणमति माताजी नाम प्राप्त किया है। मुरैना शहर के लोहिया बाजार निवासी स्व.रामरतन जैन भंडारी (गोसपुर वाले) की पुत्रवधू सरला जैन धर्मपत्नी स्व.श्री सुमतिचंद जैन मास्टर साहब ने बुधवार 5 जुलाई को अरिहंतगिरी (तिरुमलाई) तमिलनाडु में दिगम्बराचार्य विद्यावाचस्पति श्री सुविधिसागर की महाराज, आचार्य श्री गुलावभूषण जी महाराज, भट्टारक श्री धवलकीर्ति जी के पावन सान्निध्य में आर्यिका श्री सुविधिमति माताजी के करकमलों से जैनेश्वरी क्षुल्लिका आर्यिका दीक्षा ग्रहण की।

दीक्षा से पूर्व सरला जैन ने अपने हाथों से केशलोच किया। अपने शरीर के सभी आभूषणों को त्याग दिया। दीक्षार्थी सरला जैन ने उपस्थित सभी से एवं संसार के सभी प्राणियों से क्षमा याचना की एवं स्वयं ने भी सभी को क्षमा किया। पूज्य गुरुमां आर्यिका श्री सुविधिमति माताजी ने दीक्षा संस्कार करने से पूर्व सरला जैन के परिजनों, रिश्तेदारों, उपस्थित सभी जनों से दीक्षा हेतु स्वीकृति प्राप्त की। पूज्य श्री ने दीक्षार्थी सरला जैन की दीक्षा संबंधी सभी मांगलिक क्रियाएं कर उन्हें जैनेश्वरी क्षुल्लिका आर्यिका दीक्षा देकर आर्यिका श्री सुभूषणमति माताजी नामकरण किया। दीक्षा लेने के बाद अब सरला जैन का अपने परिवार, रिश्तेदारों आदि से कोई संबंध नहीं रहेगा। उन्होंने अब सांसारिक सुख, मोह, माया आदि सभी का त्याग कर वैराग्य धारण कर लिया है।

इनका रहा सौभाग्य
इस पावन अवसर पर आचार्य श्री सुविधिसागर महाराज का पाद प्रक्षालन दिलीपकुमार, नवीनकुमार, रोमिल जैन गौसपुर परिवार चेन्नई ने एवं शास्त्र भेंट अंजू जैन मुरार, मनीषा जैन अजमेर, संध्या जैन आगरा, रोली जैन अजमेर ने किया। नवदीक्षित क्षुल्लिका श्री सुभूषणमति माताजी को आचार्य श्री सुविधिसागर महाराज एवं भट्टारक धवलकीर्ति जी ने नवीन मोर पिच्छिका प्रदान की। नवीन अंजू जैन गौसपुर वालों को दीक्षार्थी के माता-पिता बनने का एवं कृष्णलाल संचैती चेन्नई को केशलोच की बोली लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। राकेशकुमार, पंकजकुमार, शशांककुमार, यतीश जैन मुरार ने कमंडलू, के.के.जैन, मानव जैन, रोजन जैन (चांदी वाले) परिवार आगरा ने वस्त्र, महेंद्रकुमार मनीष जैन मुरार ने शास्त्र, दिलीप जैन, नवीन जैन चेन्नई, रोमिल जैन यू एस ए ने पात्र प्रदान करने का सौभाग्य प्राप्त किया।













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